बड़कागांव : अंधाधुंध बालू उठाव से नदी और पुल का अस्तित्व खतरे में

 

  • पांच बड़े और दर्जनों छोटे पुल गिरने के कगार पर
  • 50 से 100 हाइवा समेत 500 ट्रैक्टर प्रतिदिन होती है बालू की ढुलाई

टीम एबीएन, बड़कागांव (हजारीबाग)। हजारीबाग जिले का बड़कागांव प्रखंड जहां का मुख्य व्यवसाय कृषि रहा है और दो बड़ी नदियां हाहारो एवं बदमाही दो अलग-अलग छोर से निकलकर बिश्रामपुर के निकट महुदी में जाकर मिलता है और दामोदर का रूप धारण कर उरीमारी, रामगढ़ होकर पश्चिम बंगाल की ओर कुच कर जाती है। जो सिर्फ सिंचाई और उपजाऊ भूमि बनाने में कारगर सिद्ध नहीं हुई बल्कि बड़कागांव को समृद्ध बनाने में विशेष योगदान रहा। 
उक्त नदियों की सुंदर व चिकनी अच्छे किस्म की बालू पूरे प्रदेश मे विशेष महत्व रखता था। जिसकी भंडारण इतनी थी कि कई पीढ़ियों तक इसे उपयोग में लाया जा सकता था। लेकिन बालू के कारोबारियों की नजर पड़ते ही महज चार से 5 वर्षों में नदियों का बालु ही समाप्त नहीं हुआ बल्कि नदी इतने गहरे हो गए कि नदी किनारे खेत बंजर होने लगे।साथ ही साथ जल स्तर इतना नीचे चला गया कि कुआं, तालाब व नाले का पानी बरसात में जहां एक ओर अभिशाप बनकर लोगों को तबाह करता है वहीं दूसरी ओर पानी के लिए लोग तरसते रहते हैं। 
वहीं इन नदियों पर बने 5 बड़े बड़े पुलों के साथ - साथ छोटे बड़े दर्जनों पुल-पुलिया का अस्तित्व खतरे में है तथा कई पुल ध्वस्त हो चुके हैं तथा कई गिरने के कगार पर हैं अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपए से आवागमन के लिए बनाया गया पुल जमींदोज हो जायेगा और कई गांव का संपर्क प्रखंड मुख्यालय से टूट जायेगा।

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