टीम एबीएन, इचाक (हजारीबाग)। एचआईवी एड्स का संक्रमण एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। महाविद्यालय प्रभारी पंकज कुमार ने कहा कि एचआईवी संक्रमण से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर शरीर को कमजोर करता है। इम्यूनिटी पावर कमजोर होने से वक्त के साथ लोगों में अन्य गंभीर प्रकार के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। आगे चलकर एचआईवी संक्रमन एड्स का रूप ले लेता है।
मौजूदा समय में वैश्विक आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 3.7 करोड़ से अधिक लोग एचआईवी एड्स की गंभीर समस्या के शिकार हैं। साल 2020 की एक रिपोर्ट के मुताबिक एड्स के कारण सात लाख के करीब लोगों की मौत हो गई। एचआईवी एक लाइलाज संक्रमण है, जिसकी अब तक कोई दवाई या टीका नहीं बना। लेकिन विशेषज्ञों ने एचआईवी से बचाव के उपाय बताएं हैं, जिनका पालन कर एड्स के खतरे से बचा जा सकता है।
एड्स और एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल एक दिसंबर को विश्व एड्स दिवस मनाया जाता है। एचआईवी संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति में वायरस की चपेट में आने के दो से चार हफ्ते के भीतर ही लक्षण नजर आने लगते हैं। प्रारंभिक स्थिति में संक्रमित को बुखार, सिरदर्द, दाने या गले में खराश सहित इन्फ्लूएंजा जैसी समस्याओं का अनुभव हो सकता है। संक्रमण बढ़ने के बाद अन्य गंभीर लक्षण दिखने लगते हैं। अगर एचआईवी के लक्षण किसी व्यक्ति में नजर आ रहे है तो उस व्यक्ति को आईटी टीसी सेंटर जाकर तुरंत जांच करवा लेना चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति एचआईवी एड्स से संक्रमित है तो इसका एकमात्र तरीका डॉक्टर के निगरानी में रहकर अपना उपचार करवाना एक सही तरीका है। हालांकि दवाओं के माध्यम से एचआईवी को नियंत्रित किया जा सकता है और इस संक्रमण के कारण होने वाली जटिलताओं को भी कम कर सकते हैं। एचआईवी की दवाओं को एंटी रेट्रो वाइरल थेरेपी (एआरटी) कहा जाता है। एचआईवी की गंभीरता को कम करने के लिए एआरटी शुरू में सेवन करने की डॉक्टर सलाह देते हैं।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse