टीम एबीएन, रांची। झारखंड में बिजली की किल्लत से हर कोई परेशान है, लेकिन समस्या से समाधान का फिलहाल कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, सरकार जरूर अपनी गंभीरता बयानों के जरिए जाहिर कर रही है। झारखंड में अगर बिजली कटौती की बात की जाए तो हर जिले का हाला बुरा है राजधानी रांची में करीब 4 से 5 घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है तो वहीं दूसरे जिलों का हाल भी काफी बुरा है। 13 सौ मेगावाट बिजली की जरूरत झारखंड को होती है लेकिन इसे लेकर करीब 4सौ से 5 सौ मेगावाट की कमी प्रतिदिन हो रही है, जिस कारण लोगों के साथ साथ व्यावसाई वर्ग को काफी परेशानी हो रही है। खास तौर से बच्ची की पढ़ाई बिजली की कटौती से काफी प्रभावित हो रही है।
बच्चों का कहना है कि शाम को जब उनकी पढ़ाई करने का समय होता है, तभी बिजली गुल हो जाती है। इस कारण स्कूलों में भी टीचर की डांट सुनने को मिलती है। वहीं उनका कहना है कि परीक्षा का भी समय है। ऐसे बिजली कटौती उनके लिए काफी परेशानी का सबब बना हुआ है। बिजली कटौती के कारण कई कारोबार जेनसेट पर डिपेंड हो गए हैं, जिस कारण लागत भी बढ़ जा रही है। व्यवासाइयों को बिजली बिल का भुगतान तो करना ही होता है तो इसके साथ ही जेनसेट में इस्तेमाल होनेवाले डीजल का बिल भी बढ़ चुका है।
झारखंड चैंबर आॅफ कॉमर्स के अध्यक्ष किशोर मंत्री का कहना है कि जिस तरह से बिजली की समस्या प्रदेश में है, अगर कुछ समय तक यही व्यवस्था रही तो उद्योग धंधे भी सिमट जाएंगे। झारखंड सरकार के मंत्री आलमगीर आलम ने कहा कि नए नियम के तहत राज्य में बिजली की किल्लत हुई है, जिसे लेकर सरकार गंभीर है और जल्द ही इसे लेकर ठोस निर्णय लिया जाएगा।
बता दें कि केंद्र सरकार के नये नियम के अनुसार, बकाया होने पर राज्य की बिजली में कटौती कर दी जाती है। इस कारण 15 अक्टूबर से ही झारखंड को पिक आवर में अतिरिक्त बिजली खरीदने पर रोक लगा दी गई है। इस कारण झारखंड को करीब जरूरत से कम बिजली मिल पा रही है। झारखंड को प्रतिदिन 400 से 500 मेगावाट कम बिजली आपूर्ति हो रही है और यही कारण है कि राज्य बिजली की किल्लत है।
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