एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र सरकार अगले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 24) में राजकोषीय घाटे का लक्ष्य नॉमिनल जीडीपी के 5.8 से 6 प्रतिशत के बीच रख सकती है। वहीं आगामी केंद्रीय बजट में सरकार पूंजीगत व्यय पर जोर जारी रखने के साथ व्यक्तिगत आयकर को सरल करने पर विचार कर सकती है। बजट पूर्व चर्चा में देश के जाने माने अर्थशास्त्रियों ने आज वित्त मंत्री व उनकी टीम को यह सलाह दी है।
पिछले सप्ताह से शुरू करके सीतारमण ने अब तक 8 बजट पूर्व परामर्श किये हैं। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि इसमें 7 हिस्सेदार समूह के 110 से ज्यादा आमंत्रित लोगों ने हिस्सा लिया। हिस्सेदारों के समूह में कृषि और कृषि प्रसंस्करण उद्योग, उद्योग, बुनियादी ढांचा और जलवायु परिवर्तन, वित्तीय क्षेत्र व पूंजी बाजार, सेवा व व्यापार, सामाजिक क्षेत्र, ट्रेड यूनियन और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों व अर्थशास्त्रियों ने हिस्सा लिया।
अर्थशास्त्रियों के साथ हुई बैठक के दौरान हुई चर्चा से जुड़े एक व्यक्ति ने कहा, ह्यज्यादातर अर्थशास्त्रियों ने सुझाव दिया है कि राजकोषीय घाटा जीडीपी के 4.5 प्रतिशत रखने के मध्यावधि लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए राजकोषीय घाटे को 5.8 से 6 प्रतिशत के बीच रखा जाना चाहिए। यह भी सुझाव दिया गया कि केंद्र सरकार को पूंजीगत व्यय पर जोर देना चाहिए और कर व्यवस्था सरल करने पर विचार करना चाहिए।
वित्त मंत्रालय से यह भी कहा गया है कि राज्यों को दीर्घावधि ऋण देकर समर्थन दिया जाना चाहिए, जिससे पूंजीगत व्यय कार्यक्रमों को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा है कि साथ ही राज्यों को व्यय करने में ज्यादा स्वतंत्रता दी जानी चाहिए, जिससे वृद्धि को रफ्तार मिल सके। व्यापक रूप से विचार यह था कि इस तरह के कदम से मांग के लिए माहौल बनेगा, जो दो साल की महामारी के बाद बढ़ रही है।
बैठक में शामिल होने वाले अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों में डॉ बीआर आंबेडकर स्कूल आॅफ इकनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के एनआर भानुमूर्ति, स्वदेशी जागरण मंच के अश्वनी महाजन, नैशनल काउंसिल आफ अप्लायड इकनॉमिक रिसर्च की पूनम गुप्ता, मौद्रिक नीति समिति की आशिमा गोयल, कार्तिक मुरलीधरन, इक्रा लिमिटेड की अदिति नायर, गोल्डमैन सैक्स के शांतनु सेनगुप्ता, बार्कलेज के राहुल बाजोरिया, बैंक आफ बड़ौदा के मदन सबनवीस, इक्रियर के दीपक मिश्रा व अन्य शामिल थे।
सीतारमण के अलावा बजट बनाने के काम में लगे लोगों में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी और भागवत करड, वित्त सचिव टीवी सोमनाथन, आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ, मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के साथ दीपम, कंपनी मामलों मंत्रालय के सचिवों व अन्य अधिकारियों ने इस बैठक में हिस्सा लिया।
अर्थशास्त्रियों की सिफारिशें व्यापक रूप से वही हैं, जो उद्योग संगठनों ने पिछले सोमवार को हुई बैठक के दौरान की थी। उन्होंने यह स्वीकार किया कि वैश्विक वृहद आर्थिक स्थिति के कारण संभवत: निजी क्षेत्र का पूंजीगत व्यय पूरी तरह से बहाल नहीं होगा।
इसलिए उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि पूंजीगत व्यय जारी रखने की जरूरत है, जिससे कि बुनियादी ढांचे में निवेश को समर्थन मिल सके। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कहा था कि बजट में नौकरियों के सृजन और कराधान संबंधी कदमों को प्राथमिकता देने की जरूरत है, जो व्यापक आधार पर खपत को बढ़ावा देगा।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक हिस्सेदार समूहों के प्रतिनिधियों ने 8 बैठकों के दौरान तमाम सुझाव दिए, जिसमें एमएसएमई की मदद के लिए हरित प्रमाणीकरण (ग्रीन सर्टिफिकेशन) की व्यवस्था, शहरी रोजगार गारंटी योजना, आयकर को तार्किक बनाना, नवोन्मेष क्लस्टर का सृजन, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला में सुधार, इलेक्ट्रिक वाहनों पर कर घटाना, ईवी नीति लाना, सामाजिक क्षेत्र उद्यमशीलता कोष का गठन, जल एवं स्वच्छता के लिए राष्ट्रीय नियामक प्राधिकरण, ईएसआईसी के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को शामिल किया जाना, पूंजीगत व्यय जारी रखना, वित्तीय समेकन, सीमा शुल्क कम करना आदि है।
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