एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में मातृत्व मृत्यु दर (एमएमआर) में भारी कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-16 मातृत्व मृत्यु दर प्रति प्रति लाख में 130 थी जो वर्ष 2019-20 में घटकर 97 रह गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि भारत ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में एमएमआर का लक्ष्य हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर आठ राज्यों ने सतत विकास लक्ष्य के अनुरूप एमएमआर प्राप्त कर ली है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण मातृत्व और प्रसव देखभाल सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य नीतियों और पहल ने एमएमआर को नीचे लाने में जबरदस्त तरीके से सहायता की है।
भारतीय महापंजीयक के एमएमआर पर जारी विशेष बुलेटिन के अनुसार, भारत में मातृत्व मृत्यु अनुपात (एमएमआर) में छह अंकों का सुधार हुआ है और अब यह प्रति लाख 97 जीवित प्रसव पर है।
श्री मांडविया ने कहा कि एमएमआर दर में महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गयी है। एमएमआर के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति (एनएचपी) लक्ष्य को हासिल कर लिया है और 2030 तक 70 प्रति लाख जीवित प्रसव से कम एमएमआर के एसडीजी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सही रास्ते पर है।
आंकड़ों के अनुसार मातृत्व मृत्यु दर में केरल (19) महाराष्ट्र (33), तेलंगाना (43), आंध्र प्रदेश (45), तमिलनाडु (54), झारखंड (56), गुजरात (57) और कर्नाटक (69) है।
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