मेदांता रांची में है डायाफ्रामेटिक हर्निया के विशेष इलाज की सुविधा : डॉ अविनाश कुमार झा, लेप्रोस्कोपी और गैस्ट्रो सर्जन

 

टीम एबीएन, रांची। मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, रांची डायाफ्रामेटिक हर्निया को लेकर विशेष पहल कर रहा है। अस्पताल प्रबंधन में इसके लिए विशेष इलाज की सुविधा है। हमारे यहां से इलाज करवा कर कई मरीज पूरी तरह से फिट है और सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं यह बातें मेदांता रांची के लेप्रोस्कोपी और गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टर अविनाश कुमार झा ने हॉस्पिटल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में डायाफ्रामेटिक हर्निया के बारे में जानकारी देते हुए डॉ अविनाश कुमार झा ने बताया कि डाईफ्राम एक मेंब्रेन जैसा स्ट्रक्चर होता है जो कि हमारे चेस्ट और पेट के बीच में होता है। इसका मुख्य काम सांस लेने में मदद करना होता है। इसमें जन्मजात या किसी चोट के कारण हर्निया या गैप बन जाता है तो पेट के जो आॅर्गन होते हैं वह इस डायाफ्रामेटिक हर्निया के अंदर चले जाते हैं। यानी अगर हमारी आंत अगर छाती में चली जाए तो इसे डायाफ्रामेटिक हर्निया कहते हैं।

मेदांता रांची के लेप्रोस्कोपी और गैस्ट्रो सर्जन डॉक्टर अविनाश कुमार झा ने यूनिक केस के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि बोकारो के एक चालीस साल का मरीज जो डायाफ्रामेटिक हर्निया की बीमारी से पीड़ित था जिसका मेदांता रांची में सफल उपचार किया गया था। दरअसल, उस मरीज को सीने में चोट लगी थी। वह साइकिल से गिर गया था। उसने जहां अपना इलाज कराया था वहां उसके सीने में चेस्ट ट्यूब डाला गया था। जिसके बाद वह सामान्य हो गया था। दो-तीन साल बाद उसे मरीज के पेट और सीने में दर्द हुआ। उन्होंने किसी दूसरी जगह जब फिर अपना इलाज कराया तो फिर चेस्ट ट्यूब डाला गया लेकिन उसमें स्टूल आने लगा। उसके बाद वह मरीज मेदांता रांची में आया। मेदांता रांची में उसका आॅपरेशन किया गया। 

मरीज की बड़ी आंत का बहुत सारा हिस्सा सीने में चला गया था। डॉक्टरी परामर्श के बाद यह अंदाजा लगा कि जब इस मरीज को चोट लगी होगी तो उसमे डायग्राम की इंजरी हुई होगी। वह डायाफ्रामेटिक हर्निया बन गया होगा और सब कुछ उसके अंदर चला गया होगा। मरीज के पुरे सीने में करीब डेढ़ लीटर स्टूल का फ्लूइड भरा हुआ था। मेदांता रांची में उसका आॅपरेशन हुआ आज मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।

डॉ अविनाश ने यह भी जानकारी दी कि डायाफ्रामेटिक हर्निया कंजवाइटल और एक्वायर्ड दोनों होते हैं। ज्यादातर मरीज एसिंप्टोमेटिक होते हैं यानी कि उनमें लक्षण नहीं दिखाई देता है लेकिन जिन मरीजों में लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें सांस लेने में तकलीफ, चलने पर सीने में दर्द होना, पेट में दर्द होना, हृदय व फेफड़े से संबंधित लक्षण होने लगते हैं। अगर ऐसे कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उसे प्रॉपर ईवैलुएट करने की जरूरत होती है। इलाज या सर्जरी इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज किस तरीके से प्रजेंट कर रहा है।

इस मौके पर मेदांता रांची हॉस्पिटल के डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता अस्पताल रांची में हर्निया के विशेष इलाज की सारी सुविधाएं मौजूद हैं। मेदांता रांची में किफायती दर पर बेहतरीन स्वास्थ सेवाएं दी जाती हैं। मेदांता रांची में डायाफ्रामेटिक हर्निया के इलाज के लिए विशेष तौर पर एक्सपर्ट डॉक्टर एवं अत्याधुनिक मशीनें उपलब्ध हैं। डायाफ्रामेटिक हर्निया से ग्रस्त मरीज मेदांता रांची में अपना इलाज करा सकते हैं। इस मौके पर मेदांता रांची के मार्केटिंग हेड कुमार यशवंत के अलावा कई अन्य प्रमुख लोग भी उपस्थित थे।

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