शराब का धंधा छोड़ने वाले को मिलेगा एक लाख : नीतीश कुमार

 

सीएम ने नशा मुक्ति दिवस पर किया बड़ा एलान

टीम एबीएन, पटना/रांची। बिहार में शराब का कारोबार छोड़कर लोग अब दूसरे काम में लग गए हैं। इन्हें राज्य सरकार एक लाख रुपए की मदद दे रही है। अब तक 1.47 लाख लोग इसका फायदा उठा चुके हैं। देसी शराब और ताड़ी के धंधे को छोड़कर लोग अब गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन, शहद उत्पादन आदि छोटे व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। यह बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नशामुक्ति दिवस पर पटना के ज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में कही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 नवंबर 2011 से ही हमने मद्य निषेध दिवस मनाना शुरू कर दिया था। उस समय शराबबंदी नहीं लागू थी, लेकिन लोगों को मद्य निषेध के प्रति हम लोग प्रेरित कर रहे थे। इसके पक्ष में प्रचार-प्रसार किया जा रहा था। बिहार में शराब की बिक्री से टैक्स के रूप में पांच हजार करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति होती थी। उन्होंने कहा कि साल 2015 में पटना के एक कार्यक्रम में जब हम भाषण समाप्त कर बैठे थे तो पीछे बैठी महिलाओं ने शराब बंदी की मांग की। 

हमने उसी समय कह दिया था कि अगर अगली बार चुनाव में जीत कर आए तो बिहार में शराब बंदी लागू करेंगे। शराब बंदी को लेकर अभियान चलाया गया और 1 अप्रैल 2016 से हमने बिहार में शराब बंदी लागू कर दी। गांव में देसी और विदेशी दोनों शराब को बंद कर दिया, लेकिन शहरों में विदेशी शराब की दुकान खोलने की इजाजत दी गई। शहरों में विदेशी शराब की दुकान खुलने का लोगों ने काफी विरोध किया। इसे देखते हुए हमने 5 अप्रैल 2016 से शहरों में भी विदेशी शराब की दुकान को बंद कर दिया और बिहार में पूर्ण शराब बंदी लागू हो गई।

समाज में 90 प्रतिशत लोग अच्छे
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में 90 प्रतिशत लोग अच्छे होते हैं, 10 प्रतिशत ही गड़बड़ करने वाले होते हैं। इन्हें ठीक करने के लिए सभी को प्रयासरत रहना है। उन्होंने कहा कि ताड़ के पेड़ से सूर्योदय से पहले नीरा निकलता है और सूर्योदय के बाद ताड़ी। नीरा स्वादिष्ट होता है, स्वास्थ्य के लिए भी यह लाभदायक होता है। नीरा से पेड़ा और गुड़ भी बनाया जाता है। बिहार में इस साल नीरा का काफी उत्पादन हुआ है। साल 2018 में हमने सतत् जीवकोपार्जन योजना की शुरुआत की थी। 

इस योजना के तहत शराब के धंधे से जुड़े लोगों को दूसरा धंधा शुरू करने के लिए एक लाख रुपये तक की मदद की जा रही है। जो लोग देसी शराब, ताड़ी के धंधे में लगे थे, वे लोग इसे छोड़कर गाय पालन, बकरी पालन, मुर्गीपालन, शहद उत्पादन आदि छोटे व्यवसाय शुरू कर चुके हैं। काफी संख्या में लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया है। सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत 1 लाख 47 हजार परिवारों ने इसका लाभ उठाया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2016 में पूरी दुनिया में शराब के दुष्प्रभावों को लेकर सर्वे किया था। साल 2018 में प्रकाशित उस रिपोर्ट के मुताबिक एक साल में शराब पीने के कारण 30 लाख लोगों की मौत होती है। दुनिया भर में जितनी मौत होती है, उसका 5.3 प्रतिशत मौत शराब पीने के कारण होती है। 20 से 39 आयु वर्ग के युवाओं की 13.5 प्रतिशत मृत्यु शराब पीने के कारण होती है। शराब से करीब 200 प्रकार की बीमारियां बढ़ती हैं। आत्महत्या में 18 प्रतिशत का कारण शराब सेवन है। 27 प्रतिशत सड़क दुर्घटना दारू पीकर गाड़ी चलाने के कारण होती है। मुख्यमंत्री ने वैशाली में हुई सड़क दुर्घटना में मारे गये 8 लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस ट्रक के ड्राइवर ने भी दारू पी रखी थी।

छह बसों को मुख्यमंत्री ने दिखायी हरी झंडी...
इससे पहले, कार्यक्रम की शुरुआत के पूर्व मद्य निषेध के प्रचार-प्रसार अभियान को लेकर राज्य परिवहन की 6 बसों को मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके पश्चात् मुख्यमंत्री ने नशामुक्त बिहार को लेकर आयोजित होनेवाली पटना हाफ मैराथन को लेकर लगाई गई प्रदर्शनी देखी। मुख्यमंत्री ने शराब के दुष्परिणामों पर आधारित एक लघु फिल्म भी देखी। कार्यक्रम में किलकारी के बच्चों द्वारा कव्वाली प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने सभी पंचायतों को मद्य निषेध को लेकर भेजे गए संदेश का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने मोबाइल पर जनता के नाम संदेश का भी लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री ने जीविका द्वारा चूड़ी निर्माण केंद्र, सबलपुर, पटना का उद्घाटन किया।

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