अमेरिका, ब्रिटेन समेत 10 देशों के विधान का सार है हमारा संविधान

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। संविधान की मूल प्रति को हाथों से लिखा गया है। यह काम किया प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने। वो एक कैलिग्राफिस्ट थे और इटेलिक शब्दों से खूबसूरती के साथ संविधान को लिखा। संविधान की प्रति के हर पन्ने को सजाने काम शांति निकेतन के कलाकारों ने किया। भारतीय संविधान को सिर्फ खूबसूरती के साथ पन्नों में दर्ज ही नहीं किया गया बल्कि उसे तैयार करने में दुनिया के 60 देशों के संविधान को पढ़ा और समझा भी गया। उसमें जो बातें भारत के परिप्रेक्ष्य में बेहतर लगीं उन्हें शामिल भी किया गया।
 

  1. अमेरिका: बिल आॅफ राइट्स- मौलिक अधिकारों को लेकर अमेरिकी संविधान की कई बातों को शामिल किया गया। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका तीनों स्वतंत्र रूप से काम करेंगे। यानी तीनों ही स्वतंत्र रहेंगे। कानून का समान संरक्षण मिलेगा। सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति होंगे। इन बातों भारतीय संविधान का प्रमुखता से हिस्सा बनाया गया।
  2. कनाडा: राज्य से ज्यादा पावरफुल केंद्र- भारत में कनाडाई संविधान की उस खूबी को शामिल किया गया जिसमें राज्यों के मुकाबले केंद्र को ज्यादा शक्तिशाली होने के अधिकार मिले। जैसे- केंद्र और राज्य के बीच शक्तियों का बंटवारा होना, लेकिन सबसे ज्यादा पावर केंद्र के पास होना। इसके अलावा राज्यपालों की नियुक्ति का अधिकार भी केंद्र को दिया गया है।
  3. ब्रिटेन: कैबिनेट सिस्टम और दो सदन- सरकार संसद का हिस्सा होगी और दो सदन का नियम- लोकसभा और राज्यसभा। एक नागरिकता का नियम और कैबिनेट सिस्टम को लागू किया गया।
  4. फ्रांस: समानता के साथ आजादी और भाईचारा- फ्रांस के संविधान से हर धर्म और समुदाय के लोगों को समानता के साथ रहने का आधिकार। सभी को आजादी मिलने का अधिकार संविधान में शामिल किया गया।
  5. सोवियत संघ: अधिकारों की बात- प्रस्तावना में लिखी गई सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की बात को भारतीय संविधान का हिस्सा बनाया गया है।
  6. जर्मनी: आपातकालीन शक्तियां- जर्मनी के संविधान की तरह भारत में केंद्र को कुछ आपातकालीन शक्तियां भी दी गईं। जैसे- इमरजेंसी की शक्ति। यानी आपातकाल के दौरान मूल अधिकारों का रोक।
  7. जापान : कानूनी प्रक्रिया-देश में संसद ही सर्वोच्च है। कोई भी कानून सही है या गलत न्यायपालिका उसकी जांच नहीं कर सकती। न्यायपालिका किसी कानून के संवैधानिक होने या न होने की बात परख सकती है।
  8. इन देशों के विधान को भी शामिल किया गया : दक्षिण अफ्रीका के संविधान में संशोधन को लेकर बातें कहीं गईं उसे भी भारतीय संविधान में शामिल किया गया। इसके अलावा आॅस्ट्रेलिया में राज्यों के बीच कारोबार करने की आजादी की बात कही गई और केंद्र व राज्य कानून बनाने का अधिकार मिला। इसे भी भारतीय संविधान का हिस्सा बनाया गया। इस तरह कई देशों के संविधान की खूबियों को भारतीय संविधान में शामिल किया गया।

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