एबीएन सेंट्रल डेस्क। जयपुर में चल रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के 68वें अधिवेशन में शुक्रवार को योगगुरु रामदेव ने कहा कि अतीत के गौरव और वर्तमान के शौर्य पराक्रम के साथ आने वाले समय में सभी क्षेत्रों में सभी प्रकार से भारत पूरे विश्व का नेतृत्व करे, यह जिम्मेदारी अभाविप को लेनी होगी। यह क्षमता भी केवल विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता ही रखते हैं।
उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम तथा श्रीकृष्ण से हम भारतवासियों के खून का रिश्ता है। हम ऋषि मुनियों, ज्ञानी, विद्वतजनों और पराक्रमी जनों की संताने हैं। यही विद्यार्थी परिषद का भारत बोध भी है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को वोकल फॉर लोकल और लोकल फॉर ग्लोबल के कार्य को करने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाना होगा। आप युवा शक्ति ही इस कार्य को कर सकते हैं।
योगगुरु बाबा रामदेव ने वामपंथियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लेनिन, कार्ल मार्क्स और माओ का अनुसरण करने वाले इनकी नाजायज औलाद हैं। उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे में ऋषियों का जिक्र किया और कहा कि उनसे हमारे रक्त सम्बन्ध हैं। हर भारतीय की ऋषि परम्परा है। वह उन्हीं से मिली दीक्षा के मुताबिक कार्यों को सम्पादित करता है। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान और संस्कृति को विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति बताया।
वर्तमान पीढ़ी को कर रहे दिग्भ्रमित
वामपंथियों पर आक्रामक बाबा रामदेव यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि सेक्यूलरिज्म की बात करने वाले कभी कम्युनिज्म तो कभी सोशियोलिज्म की बात कर वर्तमान पीढ़ी को दिग्भ्रमित कर रहे हैं। इन्हें आड़े हाथों लेने वाले बाबा रामदेव ने वामपंथियों को बौद्धिक दरिद्रता का शिकार बताया। संकेतों में ही युवाओं को ऐसे वामपंथियों से सतर्क रहने को कहा।
गुणों को खुद में करें आरोपित
योगऋषि रामदेव ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को सफलता का मंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए कुछ गुणों की बहुत जरूरत होती है। उन गुणों को खुद में आरोपित करना होता है। शौर्य, पराक्रम, स्वाभिमान, वीरता और राष्ट्रभक्ति की चर्चा करते हुए उन्हें आत्मसात करने का सबक दिया। योगाचार्य रामदेव ने युवाओं से कहाकि कभी कुछ बनने की सोच कर कार्य करने से अच्छा है कि हम कुछ करने की सोचें। उस दिशा में अनवरत कार्य करते रहें। एक दिन ऐसा समय आयेगा, जब वह व्यक्ति एक बड़ा व्यक्तित्व बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि समय के सदुपयोग को ध्यान में रखकर लक्ष्य के प्रति निरंतर सन्नद्ध व्यक्ति ही सफलता की सीढ़ियां चढ़ता है।
दिये सफलता के टिप्स
योगगुरु रामदेव ने युवाओं को सफलता के टिप्स भी दिये। हीनता, दीनता, नैराश्य, आत्मग्लानि, कुंठा जैसी भावनाओं को अपने अंदर स्थान न देने का संकल्प दिलाया। माता-पिता-गुरु को देवतुल्य मानने और विचारों को धरातल पर उतारने के प्रयास में निरंतरता बनाये रखने को कहा।
कराया संकल्प
योगगुरु रामदेव ने युवाओं से तीन संकल्प कराया। बताया कि इनकी अनदेखी से बनने वाले कार्य भी बिगड़ सकते हैं। इसलिए इन पर ध्यान रखें। इसके बाद उन्होंने सफलता अर्जित करने के तीन संकल्प कराये। पहला, भगवान के विधान का कभी भी अतिक्रमण नहीं करेंगे। दूसरा, देश के संविधान के प्रति हमेशा श्रद्धा रखेंगे और तीसरा वैयक्तिक जीवन की शुद्धता बनाये रखेंगे।
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