टीम एबीएन, रांची। कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले झारखंड के कई नक्सली बाहुल्य इलाकों में अब बदलाव की लहर देखने को मिल रही है। आज हम आपको झारखंड के ऐसे ही क्षेत्र के बारे में बताने में जा रहे हैं जहां कभी सरकार और कानून के विरोध में गोलियों की गूंज सुनाई देती थी। लेकिन अब वहां के हालात बदलने लगे हैं। खूंटी के सुदूरवर्ती क्षेत्र की वादियों में कभी गोलियों की गूंज और बारुद के धुएं की गंध की महक रहती थी।
जिले के रनिया और अड़की थाना क्षेत्र के अलावे करीब आधे क्षेत्रफल में नक्सलियों की तूती बोलती थी। लेकिन अब उन्हीं क्षेत्रों से लोग कानून की रक्षा और सरकार के कार्यों में साथ होकर अपने कदम आगे बढ़ा रहे हैं। जिले के कई नक्सली बहुल इलाके से लोग खूंटी जिला केन्द्र स्थित बिरसा महाविद्यालय परिसर में चल रहे होमगार्ड बहाली शिविर में रोजगार के अवसर बनाने के लिए पहुंच रहे हैं। विकास की दुनिया से दूर जंगली क्षेत्र होने के कारण बेरोजगार युवक युवतियां रोजगार की खोज में होमगार्ड के कार्य को चुना है। ऐसे में लोगों को विकास का एक माध्यम देखने को मिल रहा है।
रनिया थाना क्षेत्र के बनई निवासी पुष्पा आईंद ने बताया कि होमगार्ड बहाली की तैयारी करने के लिए बहुत कम समय मिला और कम समय में ही पूरी मेहनत की थी। जिसका नतीजा यह निकला कि दौड़ में एक्सलेंट के बराबर पहुंच गयी और आगे भी उम्मीद है कि पास कर जायेगी। वहीं रनिया थाना क्षेत्र के लोहागाड़ा निवासी प्रमोद साहू ने बताया कि कम समय में ही तैयारी किया पर आज मेहनत का फल मिला। 5 मिनट में 16 मीटर दौड़ लगाकर सबसे आगे निकला उम्मीद है कि सभी चयन प्रक्रिया में खरा उतर जायेगा। लोगों के उत्साह को देखने के बाद ये कहना बिलकुल गलत नहीं होगा की होमगार्ड बहाली क्षेत्र के लोगों की मानसिकता को बदलने में कामयाब हो सकता है।
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