एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में नकली दवा की बिक्री एक बहुत बड़ा मसला है। देश के आम लोगों या मरीजों के लिए दवा असली है या नकली, इसकी पहचान करना बहुत मुश्किल काम है। अगर आप भी इस तरह की समस्या से जूझ रहे हैं तो अब आपको राहत मिलने वाली है। सरकार दवा की पहचान सुनिश्चित करने के लिए इस पर क्यू आर-कोड छापने का नियम बना चुकी है और जल्द ही यह प्रैक्टिस शुरू हो जायेगी।
ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म के पहले चरण में दवा की बोतल, जार, कैन, ट्यूब या पत्ते पर क्यू आर-कोड छापा जाने वाला है। नकली और घटिया दवाइयों से लोगों को बचाने के लिए सरकार ने यह पहल शुरू की है। इसके तहत ग्राहक क्यूआर कोड को अपने मोबाइल से स्कैन कर यह पता लगा पायेंगे कि दवा असली है या नहीं।
केंद्र सरकार ने 300 कॉमन ट्रेंड की दवा पर क्यू आर कोड लगाने का फैसला किया है। इसका मकसद विटामिन, मधुमेह, हाइपरटेंशन और कैंसर आदि की कॉमन ड्रग की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना है।
सरकार के इस कदम से डोलो, सेरेडोन, कोरेक्स, एलेग्रा जैसे ब्रांड पर असर पड़ सकता है। इस साल जून में जारी ड्राफ्ट अधिसूचना को इसी महीने फाइनल किया गया है। दवा उद्योग ने इसे लागू कराने के लिए 18 महीने का समय मांगा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने क्यूआर कोड के नियम को लागू करने के लिए औषधि नियम 1945 में कई संशोधन की है। मार्च में स्वास्थ्य मंत्रालय ने फार्मा विभाग को 300 दवाओं की सूची जारी करने के लिए कहा था, जिन्हें क्यूआर कोड लागू करने की पहली सूची में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद एनपीपीए ने इन दवाओं की लिस्ट तैयार की थी। इसमें पेन किलर, विटामिन, डायबिटीज, गर्भनिरोधक और ब्लड प्रेशर जैसी दवाएं शामिल है।
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