यूक्रेन में युद्ध विराम का रास्ता हमें जल्द खोजना होगा : मोदी

 

जी-20 : इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया संबोधित 


एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें यूक्रेन में संघर्ष-विराम और कूटनीति की राह पर लौटने का रास्ता खोजना होगा। पिछली शताब्दी में, दूसरे विश्व युद्ध ने विश्व में कहर ढाया था। उसके बाद उस समय के नेताओं ने शांति की राह पकड़ने का गंभीर प्रयत्न किया। अब हमारी बारी है। पोस्ट-कोविड काल के लिए एक नई वैश्विक व्यवस्था की रचना करने का जिम्मा हमारे कंधों पर है। समय की मांग है कि हम विश्व में शांति, सद्भाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस और सामूहिक संकल्प दिखायें। मुझे विश्वास है कि अगले वर्ष जब जी-20 बुद्ध और गांधी की पवित्र भूमि मे मिलेगा, तो हम सभी सहमत हो कर, विश्व को एक मजबूत शांति-संदेश देंगे। पीएम मोदी इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के निमंत्रण पर तीन दिन की यात्रा पर कल रात यहां पहुंचे। आज सुबह जी-20 शिखर सम्मेलन में पहुंचने पर विडोडो ने पीएम मोदी का आत्मीय स्वागत किया। 

सत्र को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सबसे पहले आज कठिन वैश्विक वातावरण में जी-20 को प्रभावी नेतृत्व देने के लिए राष्ट्रपति विडोडो की सराहना की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, कोविड महामारी, यूक्रेन का घटनाक्रम और उससे जुड़ी वैश्विक समस्याओं ने मिल कर विश्व मे तबाही मचा दी है। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं तहस-नहस हो गई हैं। पूरी दुनिया मे जीवन-जरूरी चीजें, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति का संकट बना हुआ है। हर देश के गरीब नागरिकों के लिए चुनौती और गंभीर है। वे पहले से ही रोजमरर के जीवन से जूझ रहे थे। उनके पास दोहरी मार से जूझने की आर्थिक क्षमता नहीं है। हमें इस बात को स्वीकार करने से भी संकोच नहीं करना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र जैसी बहुपक्षीय संस्थाएं इन मुद्दों पर निष्फल रही हैं। और हम सभी इनमे उपयुक्त सुधार करने में भी असफल रहे हैं। इसलिए आज जी-20 से विश्व को अधिक अपेक्षाएं हैं, हमारे समूह की प्रासंगिकता और बढ़ी है। 


पीएम मोदी ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान भारत ने अपने 1.3 अरब नागरिकों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। साथ ही अनेकों जरूरत मंद देशों को भी खाद्यान्न की आपूर्ति की। खाद्य सुरक्षा के संदर्भ मे खाद की वर्तमान किल्लत भी एक बहुत बड़ा संकट है। आज की उवरर्क की कमी कल का खाद्य संकट है, जिसका समाधान विश्व के पास नहीं होगा। हमें खाद और खाद्यान्न दोनों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को स्थिर एवं भरोसेमंद रखने के लिए आपसी सहमति बनानी चाहिए। भारत में सतत खाद्य सुरक्षा के लिए हम प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, और मोटे अनाज यानी मिलेट्स जैसे पौष्टिक और पारंपरिक खाद्यान्न को फिर से लोकप्रिय बना रहे हैं। मिलेट्स से वैश्विक कुपोषण और भुखमरी की समस्या का भी समाधान हो सकता है। हम सभी को अगले वर्ष अंतररष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष जोर-शोर से मनाना चाहिए। 
प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था भारत की ऊर्जा सुरक्षा वैश्विक वृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमें ऊर्जा की आपूर्ति पर किसी भी तरह के प्रतिबंधों को बढ़ावा नहीं देना चाहिए तथा ऊर्जा बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करनी चाहिए। भारत स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्ध है। 2030 तक हमारी आधी बिजली नवीकरणीय स्रोतों से पैदा होगी। समावेशी ऊर्जा स्रोत संक्रमण के लिए विकासशील देशों को समयबद्ध और किफायती वित्तपोषण और तकनीक की स्थायी आपूर्ति अनिवार्य है।  
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान, हम इन सभी मुद्दों पर वैश्विक सहमति के लिए काम करेंगे। जी-20 का अगला सत्र स्वास्थ्य को लेकर अपराह्न होगा। जबकि तीसरा सत्र डिजीटल परावर्तन पर कल आयोजित किया जाएगा। पीएम मोदी ने इंडोनेशिया के बाली द्वीप पर विश्व में आर्थिक रूप से शक्तिशाली 20 देशों के शिखर सम्मेलन के प्रथम सत्र में खाद्य एवं ऊर्जा सुरक्षा विषय पर अपने संबोधन मंम ये आह्वान किया। 

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse