विश्व मधुमेह दिवस पर मेदांता रांची के डॉक्टर्स ने कहा, जीवन शैली में बदलाव, खान पान में परहेज से ही नियंत्रण संभव

 

टीम एबीएन, रांची। डाइबिटीज ऐसी बीमारी है तो धीरे से शरीर मे घर बनाती है। हालांकि इसे  इसे कंट्रोल में लाया जा सकता है। अगर कंट्रोल में लाने के बाद परहेज न किया जाए तो शरीर के लिए घातक हो सकता है। विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर मेदांता रांची के एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि अगर परहेज बंद करने के बाद दोबारा डायबिटीज होता है तो शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और यह मरीज के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है।  
मेदांता रांची के कंसल्टेंट फिजिसियन डॉक्टर (लेफ्टिनेंट कर्नल) निलभ कुमार ने कहा कि डायबिटीज का इलाज इसलिए करते हैं कि मरीज को आगे चलकर आर्गन डैमेज न हो। 

अगर किसी को डायबिटीज है तो आगे चलकर उसे हर्ट, किडनी, स्ट्रोक, नर्व्स की प्रॉब्लम और रेटिना की दिक्कत हो सकती है। अगर इसे कंट्रोल में रखा जाए तो आगे चलकर दिक्कत कम होगी। इफेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज है, उसे 20 साल तक डायबिटीज रहा और शुरू के 10-15 साल अगर किसी मरीज ने डायबिटीज को अगर कंट्रोल में रखा तो उसका इफेक्ट आगे चलकर बहुत फायदेमंद होता है। अगर किसी ने डायबिटीज होने के बाद शुरू के 5 से 10 सालों में इनिशियल कंट्रोल नहीं रखा है तो ऐसे हालत में आने वाले 5 से 10 सालों में टारगेट आॅर्गन डैमेज होने का रिस्क ज्यादा हो जाता है। टाइप वन, टाइप टू, टाइप 3 और टाइप फॉर डायबिटीज के प्रकार होते हैं। इसमें टाइप वन डायबिटीज होता है, वह जेनेटिक होता है। टाइप टू डायबिटीज में इन्वायरमेंट, लाइफस्टाइल और जेनेटिक तीनों का मेकअप रहता है।  
मेदांता रांची के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर एंड न्यूरो एनिस्थेसिया के डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज होता है, तो मरीज के नर्व्स सिस्टम पर असर पड़ता है। अगर किसी को 5 या 10 साल तक डायबिटीज है और वह कंट्रोल में नहीं है तो एक मेडिकल की भाषा में शब्द है जिसे डायबिटीज न्यूरोपैथी कहते हैं। दरअसल लंबे वक्त के डायबिटीक को दिक्कत होती है, जिसके चलते उसे पैरों में सनसनाहट और झिनझिनापन महसूस होता है। हाथ और पैरों में झिनझिनापन रहता है, इसे ही डायबीटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। पैरों में सूनापन या झीनझिनापन हो जाना, उसके लक्षण है। अगर हम डायबिटीज को कंट्रोल में रखते हैं तो इस से रिलेटेड जितने भी उसके कॉम्प्लिकेशंस हैं, कंट्रोल में रहेंगे। डायबिटीज ऐसी बीमारी है कि अगर एक बार यह हो जाता है तो पैंक्रियास में बदलाव हो जाते हैं। अगर हम डायबिटीज को अच्छे से कंट्रोल करें तो कई सारे कॉम्प्लिकेशंस को प्रिवेंट कर सकते हैं। अगर किसी को डायबिटीज हो जाता है तो सबसे पहले उसे अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। 

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