एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत दुनिया की उम्मीदों का केन्द्र बिन्दु बन गया है क्योंकि हम विकास की नयी गाथा लिख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में, जब कई देश संघर्ष कर रहे हैं, दुनिया बहुत उत्सुकता से हमारी ओर देख रही है। कुछ देश आवश्यक वस्तुओं की कमी का, तो कुछ देश ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। लगभग हर देश अपनी अस्थिर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित है।आंध्र विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान से बुनियादी ढांचा विकास की विभिन्न योजनाओं की शुरूआत करने के बाद मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में निराशा के माहौल के बीच भारत प्रत्येक क्षेत्र में नयी ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि यह इसलिए संभव हुआ है कि भारत अपने नागरिकों की उम्मीदों और जरूरतों को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए काम कर रहा है। हमारी प्रत्येक नीति, प्रत्येक फैसले का लक्ष्य आम आदमी के जीवन को बेहतर बनाना है। मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत काल में देश विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर विकास के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि विकास की यह यात्रा बहुआयामी है। इसमें आम आदमी के जीवन की जरूरतें भी जुड़ी हुई हैं तथा बेहतर और आधुनिक बुनियादी ढांचा का निर्माण भी शामिल है। पीएम मोदी ने कहा कि बहुत से लोग उनसे पूछते हैं कि वह कैसे थकते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मै थकता नहीं हूं क्योंकि हर दिन मैं 2-2.5 किलो गालियां खाता हूं... भगवान ने मुझे ऐसा आशीर्वाद दिया है कि यह मेरे अंदर पोषण में परिवर्तित हो जाता है। इस दौरान पीएम ने ये भी कहा कि मुझे गाली दो, बीजेपी को गाली दो, लेकिन अगर तुम तेलंगाना के लोगों को गाली दोगे तो तुम्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में केंद्र की विकास योजनाओं को जानबूझकर बाधित करने का काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे पर अलग-अलग विचारों के चलते देश को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने समन्वित विचार को महत्व देने का नया रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि समन्वित विचार के साथ बुनियादी ढांचे का विकास पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय कार्य योजना के जरिये संभव हुआ है। इसने न केवल विकास को गति दी है, बल्कि परियोजनाओं की लागत भी घटा दी है। मोदी ने कहा कि बुनियादी ढांचे को लेकर हम कभी इन सवालों में नहीं उलझे कि हमें रेलवे का विकास करना है या सड़क परिवहन का, बंदरगाह का विकास करना है या राजमार्ग का। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे के इस एकाकी दृष्टिकोण से देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा, इससे आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ा और माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया। उन्होंने कहा कि हमने विकास के समावेशी दृष्टिकोण को महत्व दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि गरीबों के कल्याण के लिए चलायी जा रही योजनाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। देश के करोड़ों गरीबों को पिछले ढाई साल से मुफ्त अनाज दिया जा रहा है, पिछले साढ़े तीन साल से पीएम किसान योजना के जरिए किसानों के बैंक खाते में हर वर्ष सीधे 6,000 रुपये भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह, सनराइज सेक्टर (नये उद्योगों) से जुड़ी हमारी नीति से युवाओं के लिए नये अवसर सृजित हो रहे हैं। ड्रोन से लेकर गेमिंग तक, अंतरिक्ष से लेकर स्टार्टअप तक हर क्षेत्र को हमारी नीतियों की वजह से आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब लक्ष्य सप्ष्ट होते हैं तो आकाश की ऊचाइयां हों, या समुद्र की गहराइयां, हम अवसर तलाश लेते हैं और उसे तराश भी लेते हैं। आज आंध्र प्रदेश में आधुनिक तकनीक के जरिए समुद्री ऊर्जा का दोहन करने की शुरूआत इसका एक बड़ा उदाहरण है। मोदी ने कहा कि आज देश नीली अर्थव्यवस्था (समुद्री अर्थव्यवस्था) से जुड़ी अनंत संभावनाओं को साकार करने के लिए भी बड़े स्तर पर प्रयास कर रहा है। नीली अर्थव्यवस्था पहली बार देश की इतनी बड़ी प्राथमिकता बनी है।प्रधानमंत्री मोदी ने आंध्र प्रदेश के लोगों के हितों को हमेशा प्राथमिकता देने के लिए राज्यपाल विश्वभूषण हरीचंदन, मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी और केन्द्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू का भी विशेष रूप से उल्लेख किया।
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