पेंशनेबल सैलरी के आधार पर ही ईपीएफओ सब्सक्राइबर को पेंशन

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 को बरकरार रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के साथ ही अदालत ने केरल उच्च न्यायालय के 2018 के उस आदेश को पलट दिया है जिसमें उच्च न्यायालय ने पेंशन के कैलकुलेशन के लिए 15,000 रुपए की पेंशनेबल सैलरी की सीमा को अनुचित माना था और निर्णय दिया था कि अंतिम 60 महीनों की औसत सैलरी (बेसिक सैलरी का 8.33 फीसदी) के आधार पर पेंशन का निर्धारण होना चाहिए, न कि अधिकतम 15,000 रुपये की पेंशनेबल सैलरी के आधार पर। कर्मचारी पेंशन (संशोधन) योजना 2014 के मुताबिक 1 सितंबर 2014 के बाद ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों के पेंशन के कैलकुलेशन के लिए पेंशनेबल सैलरी की सीमा मासिक 15,000 रुपये है। जबकि 1 सितंबर 2014 से पहले ज्वाइन करने वाले कर्मचारियों के पेंशन के कैलकुलेशन के लिए पेंशनेबल सैलरी की सीमा मासिक 6,500 रुपये थी। कर्मचारी पेंशन स्कीम 1995 के अनुसार आपके एम्प्लॉयर द्वारा ईपीएफ में किए गए कॉन्ट्रीब्यूशन का एक निश्चित हिस्सा ईपीएस में जाता है। नियमों के मुताबिक आप अपनी बेसिक सैलरी प्लस डीए (अगर डीए नहीं है तो बेसिक सैलरी) का 12 फीसदी ईपीएफ में कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं। जितनी रकम आप ईपीएफ में कॉन्ट्रीब्यूट करते हैं, उतनी ही रकम यानी 12 फीसदी की राशि एंप्लॉयर भी आपके ईपीएफ अकाउंट में कॉन्ट्रीब्यूट करता है। लेकिन एम्प्लॉयर के कॉन्ट्रीब्यूशन का एक हिस्सा ईपीएस में जाता है। यह हिस्सा बेसिक सैलरी का 8.33 फीसदी या अधिकतम 1,250 रुपये होता है। हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने एढर में शामिल होने के लिए 15,000 रुपये मासिक वेतन की सीमा को रद्द कर दिया। प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने पेंशन योजना में शामिल होने के विकल्प का इस्तेमाल नहीं किया है, उन्हें छह महीने के भीतर ऐसा करना होगा। पीठ ने कहा कि पात्र कर्मचारी जो अंतिम तारीख तक योजना में शामिल नहीं हो सके, उन्हें एक अतिरिक्त मौका दिया जाना चाहिए क्योंकि केरल, राजस्थान और दिल्ली के उच्च न्यायालयों द्वारा पारित फैसलों में इस मुद्दे पर स्पष्टता का अभाव था। पीठ ने 2014 की योजना में इस शर्त को अमान्य करार दिया कि कर्मचारियों को 15,000 रुपये से अधिक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत का अतिरिक्त योगदान देना होगा। हालांकि, अदालत ने कहा कि फैसले के इस हिस्से को छह महीने के लिए निलंबित रखा जाएगा ताकि अधिकारी कोष एकत्र कर सकें। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और केंद्र ने केरल, राजस्थान और दिल्ली के उच्च न्यायालयों के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें 2014 की योजना को रद्द कर दिया गया था।

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