एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में महंगाई से हाहाकार है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद स्थिति बहुत भयावह हो चली है। सप्लाई और डिमांड में इतना बड़ा अंतर आ गया है कि कई जरूरी चीजों के दाम में लगातार वृद्धि जारी है। भारत भी इस संकट से जूझ रहा है, जहां सितंबर में 7.40 परसेंट महंगाई दर्ज की गयी। कई महीने से इसकी दर ऊंची बनी हुई है। भारत के अलावा यूरोप के कई देशों में महंगाई दर 10 परसेंट से ऊपर चल रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरो करंसी का इस्तेमाल करने वाले 19 यूरोपीय देशों में महंगाई अक्टूबर में रिकॉर्ड 10.7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गयी है। प्राकृतिक गैस और बिजली की आसमान छूती कीमतों ने अर्थव्यवस्था की रफ्तार को भी धीमा कर दिया है। तेल के दाम पहले से कम हुए हैं, लेकिन कुछ अन्य फैक्टर के चलते ग्राहकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभी हाल में ओपेक देशों के संगठन ने कहा है कि वे कच्चे तेल की सप्लाई को कम करेंगे। इस ऐलान के बाद दुनियाभर में तेल के दाम बढ़ने की आशंका बढ़ गयी है। दूसरी ओर, यूरोपीय देशों को रूस सबसे अधिक नेचुरल गैस सप्लाई करता है। लेकिन युद्ध के चलते इसमें बड़ी बाधा आयी है जिससे वहां गैसों के दाम आसमान पर पहुंच गये हैं। ऐसी आशंका है कि आगे हालात और भी बिगड़ सकते हैं। यूरोपीय संघ के सांख्यिकी संगठन यूरोस्टैट ने सोमवार को अक्टूबर महीने के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि एक साल पहले की तुलना में इस महीने महंगाई दर 10.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी। इसके पहले सितंबर में महंगाई 9.9 प्रतिशत रही थी। यह यूरोजोन में 1997 के बाद महंगाई का उच्चतम स्तर है। यूरोपीय संघ के कुल 28 में से 19 देशों में यूरो करंसी का इस्तेमाल किया जाता है। इन्हें सामूहिक तौर पर यूरोजोन कहा जाता है। यूरोस्टैट ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण नेचुरल गैस की कीमतों में आये उछाल और बिजली के दाम बढ़ने से महंगाई में यह तेजी आयी है। ऊर्जा संसाधनों पर खर्च बढ़ने से उपभोक्ताओं का अन्य जरूरी चीजों पर खर्च घट गया है। यूरोस्टैट के मुताबिक, खाने-पीने के सामान, शराब और तंबाकू उत्पादों के दाम 13.1 प्रतिशत बढ़े हैं जबकि ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में 41.9 प्रतिशत का उछाल आया है। इस बीच कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभावों से उबरने की कोशिश में लगी यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था ने जुलाई-सितंबर तिमाही में 0.2 प्रतिशत की ही वृद्धि दर हासिल की है। इसके पहले अप्रैल-जून तिमाही में वृद्धि दर 0.8 प्रतिशत रही थी। यूरोपीय केंद्रीय बैंक ने पिछले हफ्ते एक अनुमान में कहा था कि अगले साल महंगाई 5.8 प्रतिशत रह सकती है। तीन महीने पहले लगाये गये अनुमान में इसके 3.6 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी। यूरोप समेत दुनिया के तमाम हिस्सों में इस साल महंगाई का उच्च स्तर देखा जा रहा है। अमेरिका और ब्रिटेन में भी महंगाई ने पिछले 40 वर्षों के सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया है।
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