टीम एबीएन, कोडरमा। धरती के कण-कण में और लोगों के मन में छठ बसा हुआ है। यह पर्व ही नहीं परंपरा भी है। राजस्थानी समाज की मीना चौधरी लगातार 33 वर्षों से छठ कर रही है। छठ पर्व की शुरुआत उन्होंने डेहरी ओनसोन के सोन नदी पर की थी और शादी के बाद झुमरी तिलैया से कई साल तक डेहरी जाकर ही छठ पर्व मनाती रही। इधर, तिलैया में नया आवास बनने के बाद छठ के लिए एक अलग हॉल बनाया गया है जिसमें सालों भर छठ की सामग्री रहती है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष वो अपने घर की छत पर हौदा बनाकर नियम और निष्ठा के साथ पर्व को मना रही है। इस साल परिवार के लोगों के अलावा एक अन्य परिवारों के लिए भी व्रत कर रहे हैं। इस साल लगभग 35 सूप और डालिया की पूजा की जायेगी। परिवार की महिलाएं गेहूं चुनने से लेकर ठेकुवां बनाने में सहयोग कर रही है। परिवार के लोगों ने कहा कि इस पर्व को लेकर मन में खुशी है कि छठ के सिवाय कोई दूसरी बात नहीं होती है। सुबह से शाम तक पूजन सामग्री एवं अन्य व्यवस्था में ही समय बीत जा रहा है। बताते चलें कि जहां अब एकल परिवार की परंपरा हो गई है और यह पर्व ऐसा है कि संयुक्त परिवार की परिभाषा को भी सशक्त बनाता है। मालूम हो कि स्टेशन रोड में पहले बिहारीलाल भगवान दास और चौधरी ब्रदर्श परिवार के 50 सदस्य एक साथ छठ के गुणगान में दिवाली के बाद से ही लगे रहते हैं। व्रती मीना चौधरी के भाई सुशील अग्रवाल भिलवाड़ा से इस पर्व को मनाने के लिए हर साल तिलैया पहुंचते हैं।
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