एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय खुफिया एजेंसी के अधिकारियों ने शुक्रवार को यूएन काउंटर टेरररिज्म कमेटी को बताया है कि 2018 में जब पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की ग्रे लिस्ट में जोड़ा गया था। तब भारत में बड़े लक्ष्य पर आतंकी हमलों में कमी आई और पाकिस्तान की जमीन पर भी 75 प्रतिशत तक आतंकी हमलों में कमी आई थी। अधिकारियों ने सीटीसी के सामने पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के बारे में भी बड़े खुलासे किये। एजेंसी ने इस आतंकी संगठन का मुंबई हमलों में हाथ बताते हुए इसके नेता और आतंकी साजिद मीर का एक ऑडियो भी चलाया था। इस ऑडियो में साजिद मुंबई के चाबड़ हाऊस में मौजूद आतंकियों को जो दिखे उसे मारने के निर्देष दे रहा था। इस हमले में कई लोग मारे गये थे। इंटेलिजेंस ऑफिशियल्स ने यह पूरी जानकारी मुंबई में संयुक्त राष्ट्र परिषद के सीटीसी कार्यक्रम के दौरान दी है। इस कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी सदस्य देशों को आतंकवाद पर जमकर खरी-खरी सुनाई थी। संयुक्त सचिव सफी रिजवी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद विरोधी समिति को इस इस पूरे मामले की जांच करनी चाहिए। यूएनएससी समिति की एक विशेष बैठक में, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है, रिजवी ने हालांकि किसी भी समय पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर होने की संभावनाओं के बाद आतंकवादी गतिविधियां बढ़ने की आशंकाएं भी बढ़ गई हैं। रिजवी ने कहा कि 2014 में जम्मू कश्मीर में हार्ड टारगेट- सरकारी कार्यालयों, सैन्य और पुलिस शिविरों को निशाना बनाकर पांच हमले, 2015 में आठ हमले और 2016 में 15 हमले किये गये थे। उन्होंने कहा कि 2017 में यह संख्या गिरकर आठ हो गई और 2018 में और कम होकर तीन हो गयी। अधिकारी ने बताया कि 2019 में, पुलवामा हमले के रूप में एक बहुत बड़ा हमला हुआ, जबकि 2020 में, किसी भी हार्ड टारगेट पर हमला नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि 2021 में हार्ड टारगेट पर हमले बढ़ने शुरू हुए और 2022 में भी यह सिलसिला जारी रहा। उन्होंने कहा कि यह गिरावट 2018 से 2021 तक क्यों हुई? एक कारण पाकिस्तान का ग्रे लिस्ट में शामिल होना था। अधिकारी ने कहा कि विस्तृत खुफिया जानकारी के साथ आतंकवाद-रोधी अभियान, बालाकोट हवाई हमले के बाद पूरे आतंकवादी ढांचे के खिलाफ अभियान चलाया गया और अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने बाद अलगाववाद की प्रवृत्ति कम हो गयी। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों गतिविधियों में कमी के ये चार कारण थे। उन्होंने कहा कि 2021 में जब पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर किये जाने की संभावना बढ़ गई तो सीमा पार आतंकवादी बुनियादी ढांचे और भारतीय ठिकानों पर हमलों की वापसी हुई। रिजवी ने कहा कि 2018 के मध्य में सीमा पार 600 आतंकवादी ठिकाने थे, लेकिन एफएटीएफ की सूची के दौरान यह संख्या 75 प्रतिशत कम हो गयी थी।
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