जानें छठ पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व...

 

टीम एबीएन, टाटीझरिया (संदीप शास्त्री)। शास्त्रों एवं पुराणों के विशेषज्ञ मतानुसार शास्त्री संदीप पांडेय ने कहा कि छठ पूजा धार्मिक सांस्कृतिक और आस्था का लोकपर्व है। यही एक मात्र ऐसा त्योहार है जिसमे सूर्य देव का पूजन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। हिंदू धर्म मे सूर्य की उपासना का विशेष महत्व है। वे ही एक ऐसे देवता है। जिन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा जाता है। वेदों में सूर्य देव को जगत की आत्मा कहा जाता है। सूर्य के प्रकाश में कई रोगों को नष्ट करने की क्षमता पायी जाती है। सूर्य के शुभ प्रभाव से व्यक्ति को आरोग्य, तेज और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। यह चार दिवसीय उत्सव है। जिसकी शुरुआत कार्तिक महीना शुक्लपक्ष चतुर्थी से नहाय खाय के साथ आरंभ होता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष के सप्तमी तिथि को समापन होता है। व्रत आरंभ विधि : प्रथम दिवस- चतुर्थी तिथि को नहाय खाय से मतलब है कि इस दिन स्नान के बाद पूजा घर की साफ-सफाई की जाती है और मन की तामसिक प्रवृति से बचने के लिए शाकाहारी भोजन किया जाता है। द्वितीय दिवस- पंचमी तिथि को खरना। खरना का अर्थ छठ पूजा का दूसरा दिन है। खरना का मतलब पूरे दिन के उपवास से है। इस दिन व्रत रखने वाली व्यक्ति या स्त्रियां जल की एक बूंद तक ग्रहण नहीं करते हैं। संध्या के समय गुड़ की खीर, दूध चावल का हविस तथा फलों का ईश्वर को भोग लगा खाती है। तृतीय दिवस- छठ पर्व के तीसरे दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य को अर्घ्य। इस वर्ष 30 अक्टूबर 2022 को हृषिकेश पञ्चाङ्ग के अनुसार शुभ मुहूर्त संध्या-5:34 को देने का उल्लेख है। शाम को बांस की बनी टोकरी, फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया जाता है, जिसके बाद व्रती अपने परिवार के साथ सूर्य को अर्घ्य देते हैं। अर्घ्य के समय सूर्य को जल और दूध चढ़ाया जाता है।और प्रसाद भरे सुप से छठी मैया की पूजा की जाती है। सूर्य देव की उपासना के बाद छठी मइया की गीत गायी जाती हैं। चतुर्थ दिवस- सप्तमी तिथि को हृषिकेश पञ्चाङ्ग मतानुसार 31 अक्टूबर 2022 दिन सोमवार को प्रात:- 6:27 मिनट को अर्घ्य अर्पण सूर्य देव को किये जाने का पञ्चाङ्ग मत है। उसके बाद छठी मइया की पूजा की जाती है। बाकी देशाचार के अनुसार भास्कर को अर्घ्य अर्पण किया जा सकता है। इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है। छठ पूजा विधि : छठ पूजा आरंभ करने से पहले निम्न सामग्रियों को इक्कठा कर लें और फिर सूर्य देव को विधि विधान से अर्घ्य देकर पूजन करें- बांस की 3 बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने 3 सूप, कांसा का थाली, तांबा का लोटा, दूध और ग्लास। चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नारियल, हल्दी, अदरख, गन्ना, पान पत्ता, कपूर, जाफर, काफर, सुपाड़ी, सुथनी शकरकंद, नाशपती, बड़ा नींबू (डेंभा), मधु (शहद) चंदन, धूप, धूपबती, प्रसाद के रूप में ठेकुआ, पंचमेवा, काजू, किशमिस, बादाम, मूंगफली, पिस्ता, मखान, नारियल जलवाला, नवीन वस्त्र समेत अन्य पूजन सामग्री को इकट्ठा कर लें। छठ पूजा से जुड़ी पौराणिक कथा : छठ व्रत का उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण से लिया गया। प्राचीन काल मे कथा के अनुसार प्रथम मानव स्वयंभु मनु के पुत्र राजा प्रियव्रत को कोई संतान नहीं थी। राजा बहुत दु:खी रहते थे। महाश्री कश्यप ने राजा से पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ करने को कहा। महाश्री की आज्ञानुसार राजा ने पुत्र प्राप्ति के यज्ञ कराया। इसके फलस्वरूप कुछ महीने के बाद राजा की धर्मपत्नी महारानी मालिनी ने एक पुत्र को जन्म दिया। लेकिन दुर्भाग्य से वह शिशु मृत पैदा हुआ। इस बात से राजा और अन्य परिजन कुटुंब जन बेहद दु:खी थे। तभी आकाश से एक विमान उतरा जिसमें माता जगत जननी दुर्गा के षष्ठम अवतार माता कात्यायनी विराजमान थी। तब राजा ने उनसे विनय और नम्रतापूर्वक प्रणाम किया। जब राजा ने माता से प्रणाम कर प्रार्थना की, तो माता ने उन्हें परिचय दिया। राजा के कष्टों वेदनाओं को सुना और राजा से कहा कि मैं ब्रह्म की मानस पुत्री देवी षष्ठी देवी कात्यायनी हूं। मैं विश्व मे बालको की रक्षा करती हूं और नि:संतानों को सन्तान प्राप्ति की वरदान देती हूं। इसके बाद देवी ने मृत शिशु को आशीष देते हुए हाथ लगाया, जिससे वह जीवित हो गया। देवी की इस कृपा से राजा बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने षष्ठी देवी से व्रत को जानकर उनकी विधिवत पूजा, अर्चना, आराधना, हवन आरती की। मान्यता है कि इसके बाद से संपूर्ण भारतवर्ष धीरे-धीरे इस महाव्रत छठ पूजा चारों ओर प्रचार-प्रसार हो गया। इसी दिन तिथि महीने से यह व्रत का आरंभ हुआ। उदाहरणस्वरूप इसी प्रकार से रामायण और महाभारत जैसे अनन्य ग्रंथों में भी देखा जा सकता है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse