एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने गाम्बिया में बच्चों की मौत के मामले पर चिंता जतायी है। उन्होंने कहा कि इन सभी बच्चों की मौत का चार भारतीय निर्मित कफ सिरप से जुड़ना एक गंभीर मुद्दा है। स्वामीनाथन गुरुवार को पुणे में विकासशील देशों के वैक्सीन मैन्युफैक्चरर्स नेटवर्क (डीसीवीएमएन) की वार्षिक आम बैठक से इतर पत्रकारों से बात कर रही थीं। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट ने गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत को भारत में बने चार कफ सिरप से जोड़ा है। स्वामीनाथन ने कहा कि भारत सरकार डब्ल्यूएचओ के संपर्क में है क्योंकि डब्ल्यूएचओ ने वास्तव में जांच के आधार पर रिपोर्ट प्रदान की थी जो यह साबित करने के लिए की गई थी कि यह डायथिलीन ग्लाइकोल संदूषण के कारण था। यह एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना है। उन्होंने कहा कि भारत में केंद्रीय और राज्य स्तर के दवा नियामक हैं और उनके संचालन में सामंजस्य स्थापित करने की जरूरत है। ऐसा कोई तंत्र नहीं है जहां विभिन्न राज्यों के नियामक वास्तव में एक साथ काम कर सकते हैं, एक दूसरे के उत्पादों पर निरीक्षण कर सकते हैं। भारत को जेनेरिक दवाओं और टीकों के क्षेत्र में अग्रणी बने रहने के लिए, यह साबित करना महत्वपूर्ण है कि उनके पास एक बहुत मजबूत नियामक प्रणाली है। बता दें कि गाम्बिया में 69 बच्चों की मौत के बाद भारतीय कफ सिरप निर्माता कंपनी जांच के घेरे में है। भारत सरकार की ओर से इस संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन को एक पत्र भी लिखा गया है, जिसमें कहा गया है कि उसके द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी एटिओलॉजी (रोग व मृत्यु का कारण पता करने वाला वैज्ञानिक अध्ययन) का निर्धारण करने के लिए पर्याप्त नहीं है। ऐसे में भारत के औषधि महानियंत्रक ने इस संबंध में अधिक क्लीनिकल जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
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