टीम एबीएन, केरेडारी। प्रखंड के पचड़ा गांव में विगत 10 अक्टूबर की रात्रि हुए एक दलित युवक सीटन भुइयां की हत्या मामले में भारतीय जनता पार्टी पीड़ित परिवार के सहयोग के लिये बुधवार को दूसरी बार पचड़ा गांव गये और आर्थिक व अनाज के रूप में सहयोग किया। बुधवार को सांसद प्रतिनिधि बड़कागांव विधान सभा क्षेत्र बालेश्वर कुमार के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता पचड़ा गांव जाकर पीड़िता पारो देवी को पच्चास हजार रुपये नगद व दो बैग चावल का सहयोग किया।इस दौरान सांसद प्रतिनिधि श्री कुमार ने कहा यह सहयोग राशि सांसद जयंत सिन्हा और सिमरिया विधायक किशुन कुमार दास के द्वारा उपलब्ध कराया गया है। इस परिवार में सीटन हिं एक मात्र कमाने वाला शख्स था। जिसकी हत्या से यह परिवार पूरी तरह से टूट गया है, यह परिवार भूमिहीन भी है। आय का कोई साधन नहीं है इसलिये प्रशासन को चाहिये इस पीड़ित परिवार का मदद करे। वैसे भाजपा इस परिवार के साथ खड़ा है इन्हें आगे भी हर सम्भव मदद की जायेगी। यहां सांसद प्रतिनिधि बालेश्वर कुमार के साथ केरेडारी प्रमुख सुनीता देवी, केरेडारी के सांसद प्रतिनिधि बद्रीनारायण सिंह समेत भाजपा के स्थानीय नेता कराली पंसस सुरेश भुइयां, बालगोविंद सोनी, बासुदेव पासवान, अमित प्रसाद गुप्ता, बैजनाथ तिवारी, बसंत यादव समाजसेवी प्रेमरंजन पासवान, देवनारायण राणा, बिहारी पासवान भी मौजूद थे। ज्ञात हो कि घटना के तुरत बाद भाजपा एस सी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह चंदनकियारी विधायक अमर कुमार बाउरी व सिमरिया विधायक किशुन कुमार दास, सांसद प्रतिनिधि बालेश्वर कुमार व अन्य भाजपा कार्यकर्ता पचड़ा गांव जाकर पीड़ित परिवार से मिला था। आंशिक रूप से सहयोग भी किया था। घटने की जानकारी भी लिया व हर संभव मदद का भरोसा भी दिया गया था। पीड़ित परिवार को मिले इस आर्थिक सहयोग से ग्रामीण सांसद जयंत सिन्हा और विधायक किशुन कुमार दास के प्रति आभार व्यक्त किया है। इधर, पीड़ित परिवार को इस घटने में स्थानीय विधायक अंबा प्रसाद व उतरी क्षेत्र जिला परिषद गीता के प्रति नाराजगी भी दिख रही है। एक जनप्रतिनिधि के दबाव में काम कर रही है पुलिस : बालेश्वर-सांसद प्रतिनिधि बालेश्वर कुमार ने कहा है कि इस जघन्य हत्या मामले में स्थानीय एक जनप्रतिनिधि के दबाब में पुलिस काम करती दिख रही है। कारण मृतक के भाई सिकंदर भुइयां और इसकी पत्नी सिमा देवी को एक सप्ताह थाना में रखकर पूछ ताछ किया जाता है वहीं मुख्य आरोपी शंकर साव गिरफ्तार होता है और मात्र दस मिनट में बगैर कुछ पूछ-ताछ किये उसे पुलिस जेल भेज देती है, जो एक सवाल खड़ा कर रहा है कि आखिर किसके दबाव में है पुलिस।
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