टीम एबीएन, रांची। झारखंड में बनने वाले तरह-तरह के प्रोडक्ट्स को केंद्र सरकार के सहयोग से माली, मॉरिटानिया और रवांडा जैसे कई अफ्रीकी देशों के बाजार तक पहुंचाने की योजना है। इससे जुड़ी संभावनाओं की तलाश में मॉली-मॉरिटानिया के भारतीय राजदूत अंजनी कुमार और रवांडा के राजदूत ऑस्कर केरकेट्टा झारखंड के दौरे पर हैं। इस योजना पर झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव सुखदेव सिंह के साथ विचार-विमर्श के बाद दोनों राजदूतों ने सोमवार-मंगलवार को रांची, रामगढ़ और हजारीबाग जिले में अलग-अलग उत्पादों की प्रोडक्शन यूनिटों का निरीक्षण किया। राजदूतों ने रांची के ओरमांझी प्रखंड अंतर्गत कुल्ही स्थित टेक्सटाइल हब में तैयार होने वाले कपड़ों, रामगढ़ के सुकरीगढ़ा में सिल्वर ज्यूलरी क्लस्टर और हजारीबाग में सोहराई पेंटिंग और डोकरा आर्ट क्लस्टर में बनने वाले प्रोडट्क्स का जायजा लिया। उन्होंने कारीगरों-शिल्पकारों से प्रोडक्ट्स की विशेषताओं, तैयार करने की प्रक्रिया, लागत और उत्पादन क्षमता आदि के बारे में जानकारी ली। अफ्रीकी देशों में इनके निर्यात और खपत की संभावनाओं के बारे में वे केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपेंगे। आगामी 20 से लेकर 22 अक्टूबर तक गुजरात के केवड़िया में भारतीय राजदूतों का सम्मेलन होना है। इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करने वाले हैं। इस सम्मेलन में भी वे झारखंड के प्रोडक्ट्स के बारे में चर्चा करेंगे। मॉली-मॉरिटानिया के भारतीय राजदूत अंजनी कुमार ने कहा कि झारखंड में बन रहे उत्पादों की अपनी खासियत है। ये वल्र्ड क्लास के मापदंडों पर भी खरे हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड के कारीगरों और शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलायी जा सकती है। राज्यपाल, मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मुलाकात के दौरान भी दोनों राजदूतों ने झारखंड और अफ्रीकी देशों के बीच साझा सहयोग, निवेश और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की हैं।
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