टीम एबीएन, हजारीबाग। प्रतिबंध के बावजूद जिले में अवैध लॉटरी का धंधा फल-फूल रहा है। सदर थाना क्षेत्र में भी कई लोग अवैध लॉटरी का कारोबार कर रहे हैं। लॉटरी माफिया के सामने जिला प्रशासन बेबस नजर आ रही है। जानकारी के बावजूद अवैध लॉटरी का खेल रोकने में इनकी दिलचस्पी नहीं है। इस गोरखधंधे के जरिए लोगों को मालामाल करने का लालच दिया जा रहा है। भोले-भाले लोगों को इस कारोबार में फंसाया जा रहा है। खासकर निर्धन तबके व युवा वर्ग को मामूली हिस्से का लालच देकर धंधा कराया जा रहा है। इससे न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि लोग अपनी गाढ़ी कमाई को भी गंवा रहे हैं। चंद मिनटों में करोड़पति बनने के लालच में लोग लॉटरी की खरीदारी कर रहे हैं। लेकिन पुलिस प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं जा रहा है। खुलेआम चल रहा धंधा : जिला मुख्यालय में यह गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है। सूत्र बताते हैं कि इस गोरखधंधे से जुड़े कारोबारी खुद करोड़पति बन चुके हैं। जबकि लॉटरी खरीदने वाले लोग मेहनत की गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं। खासकर रिक्शा चालक, फुटपाथी दुकानदार व युवा इन कारोबारियों की जाल में आसानी से फंस रहे हैं। नहीं हो रही कार्रवाई : इस मामले पर समाजसेवी अभिषेक कुमार कहते है कि 8 जुलाई को उन्होंने जिले के उपायुक्त के नाम से केंद्रीय गृह सचिव भारत सरकार, गृह सचिव झारखण्ड सरकार, पुलिस उप महानिरीक्षक, छोटानागपुर प्रमंडल हजारीबाग के नाम से आवेदन दिया था। यहां तक की वे खुद लॉटरी के रोकथाम को लेकर आयुक्त से मिले थे। बताया कि आयुक्त ने मेरे कार्य की सराहना करते हुए इसके रोकथाम हेतु उचित कार्रवाई की बात की थी, मगर आज तक कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि अधिकारियों को ये तक जानकारी दे दी की लॉटरी कहां-कहा बेची जा रही है, इसकी लोकेशन तक बता दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इससे तो यही पता चलता है कि लॉटरी माफिया की जड़ें काफी मजबूत हैं।
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