टीम एबीएन, रांची। सुनने में भले ही यह अटपटा लगे, लेकिन यह बात सच है कि कैदियों और अपराधियों को इलाज कराने के लिए नहीं बल्कि पुलिस कस्टडी से भागने के लिए ही रिम्स अस्पताल इलाज के नाम पर लाया जाता है। रांची के रिम्स अस्पताल के कैदी वार्ड से शनिवार रात करीब ढाई बजे दो कैदी फरार हो गये। दोनों कैदियों ने पहले बाथरूम की ग्रिल तोड़ी और वहां से भाग गये। जिसके बाद इस मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस ने शहर में नाकाबंदी कर दी और दोनों की तलाश में जुट गयी। मिली जानकारी के अनुसार बाथरूम की खिड़की की ग्रिल खराब थी। इसी का फायदा दोनों कैदियों ने उठाया। फरार कैदियों में उग्रवादी अमित उरांव (गुमला का रहने वाला) और मशरूर आलम खान (हजारीबाग का रहने वाला) शामिल है। वहीं इस मामले में रांची के एसएसपी ने कहा कि मामले की जानकारी मिली है और उच्च अधिकारी रिम्स अस्पताल मे कैदी वार्ड जाकर जांच कर रहे है। दोनों अपराधियों के जिले में हाई अलर्ट जारी किया गया है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए रांची में भी लगातार छापेमारी की जा रही है। जल्द दोनों को गिरफ्तार कर लिया जायेगा। इस मामले में जिन पुलिस अधिकारियों ने लापरवाही की है उन पर कड़ी कार्रवाई की जायेगी। बता दें कि रिम्स अस्पताल के कैदी वार्ड के पीछे लगी सभी खिड़कियों में जंग लग गई है, जिसे अपराधी कभी भी आसानी से खिड़की को तोड़कर फरार हो सकते हैं. वहीं कैदी वार्ड के पीछे सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं हैं। रिम्स अस्पताल के कैदी वार्ड से पहले भी कई कैदी फरार हो चुके हैं। बाथरूम का खिड़की तोड़कर दो और कैदी फरार हो गये थे, जिससे यहां की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो गया है। वहीं कैदी वार्ड के पास लगे सीसीटीवी कैमरे भी खराब पड़े हुए हैं। इसके अलावा गेट के बाहर भी पुलिस का जवान तैनात नहीं रहता है। बताया जा रहा है कि कैदी वार्ड में ही दोनों फरार हुए अपराधी एक दूसरे के संपर्क में आये और फिर दोस्ती हो गयी। दोनों ने अस्पताल से भागने का प्लान बनाया और जिसमें वे दोनों कामयाब भी हो गये। शनिवार की रात के करीब ढाई बजे उसी ग्रिल को दोनों कैदियों ने मिलकर तोड़ दिया और वहां से निकलकर फरार हो गये।
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