टीम एबीएन, रांची। भगवान की भक्ति के लिए न जाति बंधन है, न धर्म और पंथ। नारद, व्यास, सुत, शबरी, सदन कसाई, रसखान, रहीम, रजिया, फादर कामिल बुल्के इसके प्रतीक रहे हैं। भागवत की कथा मृत्यु को मंगलमय बनाने के लिए है। उक्त बातें पंडित रामदेव पाण्डेय ने कही। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत सुखदेव जी के समक्ष यजमान परीक्षित की मृत्यु के लिए लगभग 150 घन्टा शेष बचा है, तो सुखदेव ने कहा कि परीक्षित पहले इस शरीर में विराट पुरुष का चिन्तन करो और भागवत की कथा का रसास्वादन करो। यह भागवत ऐसा रसायन है जो कान में जाते ही मृत्यु को मंगलमय बना देगा। यही भक्ति देती है। भक्ति से भगवान के समतुल्यता भी मिलती है। ये बातें कथा के दूसरे दिवस की कथा में श्रीराम सह शनि मंदिर प्रांगण रांची यूनिवर्सिटी कालोनी बरियातू में कही। बताते चलें कि यह कथा आगामी 21 अक्टूबर तक चलेगी।
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