एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के अखिल भारतीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी सुबह करीब साढ़े 10 बजे कानून मंत्रियों और कानून सचिवों के इस अखिल भारतीय सम्मेलन को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संबोधित करेंगे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन गुजरात के एकता नगर में कानून और न्याय मंत्रालय की मेजबानी में किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्देश्य नीति निर्माताओं को भारतीय कानूनी और न्यायिक प्रणाली से संबंधित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक साझा मंच मुहैया करना है। इस सम्मेलन के माध्यम से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी सर्वोत्तम कार्य परंपराओं को साझा करने, नए विचारों का आदान-प्रदान करने और अपने आपसी सहयोग में सुधार करने में सक्षम होंगे। इस कार्यक्रम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के कानून मंत्री और सचिव शामिल होंगे। इस सम्मेलन में तत्काल और किफायती न्याय के लिए विवादों के वैकल्पिक समाधान के तंत्र जैसे मध्यस्थता और पंचाट फैसले, समग्र कानूनी बुनियादी ढांचे का उन्नयन, अप्रचलित कानूनों को हटाना, न्याय तक पहुंच में सुधार, लंबित मामलों को कम करना और तेजी से मुकदमों का निपटान सुनिश्चित करना, बेहतर केंद्र-राज्य समन्वय के लिए राज्य के विधेयकों से संबंधित प्रस्तावों में एकरूपता लाना और अन्य विषयों के साथ-साथ राज्य कानूनी प्रणाली को मजबूत करना जैसे विषयों पर चर्चा होगी। गौरतलब है कि देश में करीब 5 करोड़ मुकदमे पेंडिंग पड़े हुए हैं। इन मुकदमों को निपटाने के लिए न्यायपालिका में जरूरी जजों और कर्मचारियों की कमी है। एक आंकड़े के मुताबिक देश में 10 लाख की आबादी पर जजों की संख्या केवल 20 है, जो कि इतनी बड़ी संख्या में लंबित मामलों को निपटाने के लिए काफी नहीं है। भारत में निचली अदालतों में जजों और कर्मचारियों की सही समय पर भर्ती नहीं होने से हजारों पद खाली पड़े हैं, जिससे न्याय प्रणाली पर बोझ बढ़ा है।
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