जनसंख्या नीति, आत्मनिर्भरता, चीन और महिलाओं पर क्या बोले भागवत, यहां जानें...

 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दशहरे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने चीन, जनसंख्या नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, मातृशक्ति समेत कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने इस दौरान देश में रोजगार को लेकर भी अपने विचार रखे हैं। मोहन भागवत ने कहा है कि अगर सभी लोग सरकारी नौकरी के पीछे भागेंगे तो कैसे होगा। उन्होंने लोगों से आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया है। उन्होंने इसके अलावा कहा कि शक्ति शांति का आधार है। देश की अर्थव्यवस्था बेहतर हो रही है। उन्होंने यह भी कहा है कि चीन बूढ़ा हो रहा है। 1. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि नौकरी के पीछे सब भागेंगे तो कहां से होगा। सरकारी हो और घर के करीब हो तो और अच्छा है। सबको नौकरी कहां से मिलेगी? बिजनेस की ओर जाना पड़ेगा। सरकार स्टार्ट अप को बढ़ावा दे रही है। समाज को इस दिशा में ध्यान रखना है। उन्होंने कहा कि समाज को नौकरी खासकर, सरकारी नौकरी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका ये आशय कतई नहीं है कि सरकार नौकरी में कटौती करे बल्कि नौकरी को लेकर सरकारों पर नजर रखनी चाहिए। 2. डॉ भागवत ने बिजनेस पैदा करने और आत्मनिर्भर बनने पर जोर दिया। उन्होंने जोर दिया कि स्किल डेवलपमेंट और स्टार्ट अप जैसे कार्यक्रमों का समाज लाभ उठाये। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सबको नौकरी कहां से मिलेगी? किसी भी समाज में सरकारी और प्राइवेट मिलाकर अधिक से अधिक 10, 20 या 30 फीसदी ही नौकरी होती है। सरकार स्टार्ट अप को बढ़ावा दे रही है। समाज को इस दिशा में ध्यान रखना है। समाज को बिजनेस की ओर देखना होगा। 3. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राजस्थान के उदयपुर में हुई हत्या की वारदात पर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों उदयपुर में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई थी। इससे पूरा समाज हैरान रह गया था। अधिकांश लोग दुखी और गुस्सा थे. ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, यह सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद मुस्लिम समाज से भी कुछ लोगों ने नाराजगी व्यक्त की थी। यह विरोध अपवाद बनकर न रहे बल्कि अधिकांश मुस्लिम समाज का यह स्वभाव बनना चाहिए। हिंदू समाज का एक बड़ा वर्ग ऐसी घटना घटने पर हिंदू पर आरोप लगे तो भी मुखरता से विरोध प्रगट करता है। 4. मोहन भागवत ने कहा कि हमारा पड़ोसी चीन बूढ़ा हो रहा है। वो जल्दी बूढ़ा हो जायेगा। सिंगल चाइल्ड पॉलिसी की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हो रही है। वो अब दो बच्चों पर आ गए हैं, लेकिन स्थिति सुधर नहीं रही है। 50 साल आगे की सोचकर जनसंख्या नीति बनानी चाहिए। जनसंख्या बहुत कम हो गई तो समाज और भाषा ही लुप्त हो जाती है। जनसंख्या असंतुलन का परिणाम भी हमने भुगता है। 50 साल पहले हमने भुगता। लेकिन लालचपूर्ण और जबरन धर्म परिवर्तन करना ठीक नहीं है। 5. देश के विकास के लिए सनातन और नये बदलाव जरूरी हैं। सनातन और नये बदलाव साथ चलते हैं। सनातन हमें भटकाव से रोकता है। भटकाव से आपस में दूरियां बढ़ती हैं, जो सब काम मातृशक्ति कर सकती है, वो सभी काम पुरुष नहीं कर सकते हैं। महिलाओं की यह शक्ति है और इसलिए उनका सशक्तिकरण करना और उनको काम करने की स्वतंत्रता देना और कार्यों में बराबरी की सहभागिता देना अहम है। 6. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दशहरा रैली के दौरान कहा कि हमें कोशिश करनी चाहिए कि हमारे मित्रों में सभी जातियों और आर्थिक समूहों के लोग हों, ताकि समाज में और समानता लाई जा सके। जनसंख्या नीति व्यापक सोच-विचार के बाद तैयार की जाए और यह सभी पर समान रूप से लागू हो। जनसंख्या को संसाधन की जरूरी होती है। अगर यह बिना संसाधन के आगे बढ़ती है तो यह बोझ बन जाती है। धर्म आधारित जनसंख्या के असंतुलन का मामला नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जनसंख्या में असंतुलन भौगोलिक सीमा में बदलाव होता है। 7. संघ प्रमुख ने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतें हमारे समाज में जहर फैलाकर हमें कमजोर करना चाहती हैं, वो ताकतें भारत के प्रगति के विरोधी हैं और समाज में विष पैदा करना चाहते हैं। संघ को लेकर समाज में भ्रांति पैदा किये जाने का विरोध किया और कहा कि उनको लेकर दूसरे धर्मावलंबी के मन में डर पैदा किया जाता है, जो ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि ये ठीक है की संघ हिंदूवादी संस्कृति का पक्षधर है लेकिन वो दूसरे धर्म के लोगों की पूजा पद्धति और रीति रिवाज का विरोधी नहीं है बल्कि सर्व समाज संभाव की बात करता है। साथ ही डॉक्टर भागवत ने फोर्सफुल कनवर्जन यानी दबाव डालकर धर्म परिवर्तन का विरोध भी किया। 8. मोहन भागवत ने महिलाओं को सामाजिक रूप से बराबरी का दर्जा देने की वकालत की। उन्होंने कहा की विदेशी आक्रांताओं की वजह से हमारे समाज ने मातृ शक्ति को घर या पूजा घर तक सीमित कर दिया गया, जो बाद में रवायत बन गई उसको ठीक करना है। 9. पूरे विश्व में भारत की धमक बढ़ रही है। इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार की तारीफ की। श्रीलंका संकट और यूक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका की प्रशंसा की। डॉ भागवत ने खेल की दुनिया में भारत के प्रदर्शन को सराहा और कहा की अंतरराष्ट्रीय जगत के खेल प्रतिस्पर्धाओं में हाल में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया। पैरालंपिक खेलों में गोल्ड और अन्य पदक प्राप्ति की तारीफ की। 10. संघ प्रमुख ने सामाजिक बराबरी की पैरोकारी की और देश में सभी जातियों, मतों और पंथों को मंदिरों, घाटों, श्मशनों में समान व्यवहार के अवसर की पैरोकारी की। इसके अलावा उन्होंने कहा कि संघ के कार्यक्रमों में बौद्धिक और कुशल महिला मेहमानों का स्वागत करने की एक पुरानी परंपरा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति द्वारा व्यक्तित्व निर्माण की शाखा पद्धति अलग-अलग संचालित की जा रही है। राष्ट्रीय स्तर के विकास की प्रक्रिया में बाधाओं पर काबू पाने की जरूरत है।

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