एबीएन सेंट्रल डेस्क। संभावित संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने करीब दो साल पहले ही चारे की कमी को पूरा करने के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया था। इसके तहत नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की ओर से चारे के लिए करीब 100 किसान उत्पादक संगठन भी स्थापित किया जाना शामिल था, लेकिन अभी तक एक भी एफपीओ रजिस्टर्ड नहीं कराया जा सका है। इस सुस्ती की वजह से कई कृषि परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और चारे के संकट का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर से चारे के लिए 100 एफपीओ स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा सितंबर 2020 में तैयार किया गया था जो मई 2019 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में लौटने के तुरंत बाद 2019-20 के बजट में घोषित 10,000 एफपीओ बनाने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का एक हिस्सा ही था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना संकट आने से पहले 29 फरवरी, 2020 को चित्रकूट में औपचारिक रूप से इस योजना की शुरुआत की थी। चारे के लिए अब तक गठित नहीं एक भी एफपीओ : खबर के अनुसार, केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस साल 16 अगस्त तक, 13 कार्यान्वयन एजेंसियों को 8,416 एफपीओ आवंटित किये गये हैं, जिनमें से 3,287 एफपीओ रजिस्टर्ड किये गये हैं। इसके अलावा, एनडीडीबी को आवंटित 26 एफपीओ में से महज एक को ही 16 अगस्त, 2022 तक रजिस्टर्ड किया गया है। एमओएफएएचडी के सूत्रों ने बताया कि एनडीडीबी के तहत यह एफपीओ भी शहद के लिए है, न कि चारे के लिए। एफपीओ योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों का गठन और संवर्धन – का कुल बजट परिव्यय 6,865 करोड़ रुपये है, जिसमें पांच साल यानी 2019-20 से 2023-24 के लिए 4,496 करोड़ रुपये और 2024-25 से चार साल के लिए 2,369 करोड़ रुपये की प्रतिबद्ध देनदारी है। पिछले साल चारे के लिए बनाई गई खास योजना : सरकारी सूत्रों ने कहा कि 28 सितंबर, 2020 को कृषि सचिव की अगुवाई वाली नेशनल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एडवाइजरी एंड फंड सैक्शनिंग कमेटी की चौथी बैठक में चर्चा की गई एजेंडा में से एक डेयरी क्षेत्र में एफपीओ भी था। एफपीओ योजना के साथ उदार वित्तीय सहायता के लिए, यह निर्णय लिया गया कि पशुपालन और डेयरी विभाग डेयरी किसानों से जुड़े 100 एफपीओ को लेकर एक प्रस्ताव तैयार करेगा और इसे प्रस्तुत करेगा। यह मामला 10 जून, 2021 को फिर से एन-पीएमएएफएससी में चर्चा के लिए आया। कृषि सचिव ने डीएएचडी को प्रस्ताव को इस तरह संशोधित करने को कहा कि यह चारे के आसपास ही केंद्रित रहे। एनडीडीबी, प्रस्तावित कार्यान्वयन एजेंसी, को डीएएचडी के जरिए संशोधित प्रस्ताव तुरंत प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था जिससे कृषि सहयोग और किसान कल्याण विभाग एनडीडीबी को चारा प्लस मॉडल के लिए जल्द से जल्द एक कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में अधिसूचित कर सके। 100 चारा प्लस FPO के गठन का प्रस्ताव : फिर अगले दिन, केंद्रीय कृषि मंत्रालय को 100 चारा प्लस एफपीओ के गठन के लिए एक संशोधित प्रस्ताव प्राप्त हुआ। किसानों की आय बढ़ाने के लिए आत्मनिर्भर ग्राम स्तर पर भी एक मॉडल तैयार करने का विचार किया गया। सरकार की एफपीओ स्कीम के तहत, एफपीओ को तीन अलग-अलग तरीकों से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है : पहला, 18 रुपये प्रति एफपीओ की प्रबंधन लागत; प्रति एफपीओ अधिकतम 15 लाख रुपये का इक्विटी अनुदान; और उन परियोजनाओं के लिए प्रति एफपीओ क्रेडिट गारंटी कवर जहां अधिकतम ऋण 2 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
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