झारखंड : राज्यसभा चुनाव के बाद झामुमो मस्त, गठबंधन के बाकी दल त्रस्त

 

  • झारखंड : राज्यसभा चुनाव के बाद झामुमो मस्त, गठबंधन के बाकी दल त्रस्त
  • चुनाव के बाद महागठबंधन में घमासान! कांग्रेस के आरोपों पर माले का पलटवार, क्रॉस वोटिंग के आरोपों पर बढ़ा विवाद

टीम एबीएन, रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव के परिणाम के बाद महागठबंधन के भीतर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद कांग्रेस ने राजद और भाकपा (माले) पर क्रॉस वोटिंग का आरोप लगाया है। वहीं, माले ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस प्रभारी के. राजू पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं।

माले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी सफाई

शुक्रवार को रांची स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में माले नेताओं गीता मंडल और हलधर महतो ने कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी की ओर से अधिकृत पोलिंग एजेंट बनाया गया था। उन्होंने दावा किया कि माले के दोनों विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो ने मतदान के बाद उन्हें अपना मतपत्र दिखाया था, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के पक्ष में मतदान किया गया था।

क्रॉस वोटिंग का आरोप पूरी तरह निराधार

माले नेताओं ने कहा कि ऐसे में पार्टी पर क्रॉस वोटिंग का आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है। उनका कहना है कि यदि उनके विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट दिया था, तो कांग्रेस किस आधार पर माले को कटघरे में खड़ा कर रही है।

हार के बाद सहयोगियों पर आरोप लगाने का आरोप

माले नेताओं ने कहा कि कांग्रेस अपनी हार के बाद बिना किसी ठोस प्रमाण के सहयोगी दलों पर आरोप लगा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि गठबंधन की एकजुटता बनाए रखने के बजाय कांग्रेस सहयोगी दलों को सार्वजनिक रूप से कठघरे में खड़ा कर रही है।

कांग्रेस के पुराने विवादों का भी किया जिक्र

माले ने इस दौरान कांग्रेस के राजनीतिक आचरण पर भी सवाल उठाये। नेताओं ने वर्ष 2022 के उस मामले का उल्लेख किया, जब कांग्रेस के तीन विधायक भारी नकदी के साथ पकड़े गये थे। माले का आरोप है कि कांग्रेस के कुछ नेताओं की गतिविधियां पहले भी गठबंधन के लिए असहज स्थिति पैदा करती रही हैं।

कॉरपोरेट हितों के करीब होने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में माले नेताओं ने कांग्रेस पर कॉरपोरेट हितों के करीब होने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि कांग्रेस को पहले अपने संगठन और नेतृत्व स्तर पर आत्ममंथन करना चाहिए, बजाय इसके कि वह अपनी हार का ठीकरा सहयोगी दलों पर फोड़े।

आगे क्या होगा

अब सभी की नजर इस बात पर है कि महागठबंधन के घटक दल इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाते हैं या फिर यह राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और गहरा होता है। फिलहाल राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद झारखंड की राजनीति में नयी हलचल तेज हो गयी है।

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