एबीएन सोशल डेस्क। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहा जाता है, हिंदू और बौद्ध धर्म का अत्यंत पवित्र एवं प्रेरणादायक पर्व है। इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा 1 मई दिन शुक्रवार को मनायी जायेगी। यह पर्व वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को आता है और मानवता, शांति, करुणा तथा ज्ञान का संदेश देता है।
भारत सहित नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, जापान, चीन और अनेक देशों में यह पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा मुख्य रूप से भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ी मानी जाती है-उनका जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण। मान्यता है कि इन तीनों घटनाओं का संबंध वैशाख पूर्णिमा से है, इसलिए यह दिन विशेष पावन माना जाता है।
भगवान बुद्ध का जन्म लुंबिनी (नेपाल) में राजा शुद्धोधन और माता महामाया के घर हुआ था। उनका बाल्यकाल नाम सिद्धार्थ गौतम था।राजमहल में सुख-सुविधाओं के बीच पले सिद्धार्थ ने जब संसार में दुख, रोग, बुढ़ापा और मृत्यु देखी, तो उनके मन में जीवन के सत्य को जानने की जिज्ञासा जागी। उन्होंने राजपाट त्यागकर कठोर तपस्या और ध्यान किया।
बाद में बिहार के बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और वे बुद्ध कहलाए, जिसका अर्थ है-जागृत पुरुष।बुद्ध पूर्णिमा की महत्ता केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय भी है। भगवान बुद्ध ने संसार को सत्य, अहिंसा, दया, प्रेम, करुणा और मध्यम मार्ग का संदेश दिया। उनका उपदेश था कि मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, जन्म से नहीं।
आज के तनावपूर्ण और हिंसक वातावरण में बुद्ध के विचार अत्यंत प्रासंगिक हैं। इस दिन बौद्ध विहारों, मंदिरों और घरों में भगवान बुद्ध की प्रतिमा का पूजन किया जाता है। दीप जलाए जाते हैं, धम्मपद और त्रिपिटक का पाठ होता है, ध्यान लगाया जाता है तथा शांति प्रार्थनाएं की जाती हैं। लोग गरीबों को भोजन, वस्त्र और दान देकर पुण्य कमाते हैं।
कई स्थानों पर शोभायात्राएं, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। हिंदू मान्यता में भी वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इस दिन स्नान, दान, जप, तप और व्रत करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान, पीपल पूजा और सत्संग का भी विशेष फल माना गया है। बुद्ध पूर्णिमा का उद्देश्य मानव जीवन को सही दिशा देना है।
यह पर्व सिखाता है कि क्रोध का उत्तर प्रेम से, घृणा का उत्तर करुणा से और अज्ञान का उत्तर ज्ञान से दिया जा सकता है।भगवान बुद्ध का संदेश है-अप्प दीपो भव अर्थात् स्वयं अपने दीपक बनो,आज जब संसार अशांति, तनाव और संघर्ष से जूझ रहा है, तब बुद्ध पूर्णिमा हमें आत्मचिंतन, संयम और सद्भाव का मार्ग दिखाती है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि मानवता के उत्थान का संदेश देने वाला प्रेरणा पर्व है।
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