एबीएन हेल्थ डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथी के महत्व, उसके सिद्धांतों तथा समाज में उसके योगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है।
होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका आधार समरूपता का सिद्धांत, अर्थात जिस पदार्थ से किसी स्वस्थ व्यक्ति में रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं, उसी पदार्थ को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में देकर रोगी का उपचार किया जाता है। इस पद्धति की शुरूआत 18वीं शताब्दी में जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. हैनिमैन ने की थी। विश्व होम्योपैथी दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना तथा इसके सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी उपचार के रूप में प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।
इसके माध्यम से यह भी बताया जाता है कि होम्योपैथी केवल रोग के लक्षणों को नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उपचार करती है। आज के समय में, जब लोग दवाइयों के दुष्प्रभावों से चिंतित रहते हैं, होम्योपैथी एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दवाएं प्राकृतिक तत्वों से बनी होती हैं और इनके दुष्प्रभाव अत्यंत कम होते हैं।
बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा, होम्योपैथी उपचार व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर भी बल देती है। यही कारण है कि यह केवल रोग को दबाने के बजाय जड़ से समाप्त करने का प्रयास करती है। भारत में भी यह चिकित्सा पद्धति अत्यंत लोकप्रिय है और सरकार द्वारा इसे आयुष प्रणाली के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है।
विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न संगोष्ठियों, स्वास्थ्य शिविरों, कार्यशालाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। चिकित्सक, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी इस दिन होम्योपैथी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध और उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। साथ ही, आम जनता को मुफ्त परामर्श और दवाएं भी वितरित की जाती हैं।
विश्व होम्योपैथी दिवस न केवल एक चिकित्सा पद्धति के सम्मान का दिन है, बल्कि यह हमें समग्र स्वास्थ्य की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न विभिन्न रोगों के बीच होम्योपैथी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में अपनी पहचान बना रही है। इस दिवस के माध्यम से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि प्राकृतिक और संतुलित उपचार पद्धतियां हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं।
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