एबीएन एडिटोरियल डेस्क। बंगाल में हो रहे विधानसभा का चुनाव वास्तव में कई अर्थों में महत्वपूर्ण हो गया है। वामपंथियों की सरकार लंबे समय तक बनी रही। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की सरकार लगातार 2011 से सत्ता में बनी हुई है। बंगाल में सत्ता की लंबी पारी का इतिहास रहा है।
बंगाल की राजनीति हमेशा से हिंसक रही है। कई बार यह भी प्रमाणित हो चुका है कि ममता बनर्जी की सरकार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है।
आज जबकि सूचना तंत्र व्यापक एवं सर्वशुलभ हो चुकी है ऐसे में वोटर को भ्रमित करना कठिन कार्य हो रहा है।
मतदान की दृष्टि से जब कोई एक पक्ष ध्रुवीकृत होता है तो स्वाभाविक रूप से दूसरा पक्ष भी ध्रुवीकृत होगा ही। इस बार के बंगाल चुनाव में कुछ इसी प्रकार का परिदृश्य दिखाई दे रहा है।
चुनाव का मुख्य प्रतिस्पर्धा भारतीय जनता पार्टी तथा त्रिमूल कांग्रेस मध्य ही चल रहा है। लोकतंत्र में आरोप प्रत्यारोप चुनाव का प्रमुख अंग है। अभी तक के वातावरण से यही सिद्ध हो रहा है कि ममता बनर्जी को संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का उत्साह चरम पर है।
4 मई को चुनाव परिणाम आने वाले हैं, उसके पहले किसी प्रकार का दावा चुनावी दंगल का हिस्सा हो सकता है। परिणाम दिलचस्प होगा कि बंगाल की जनता पूरे देश को क्या संदेश देने जा रही है।
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