एबीएन सेंट्रल डेस्क। नीले आकाश का सच एक ऐसी पुस्तक है, जो बिहार और झारखंड की राजनीति, सत्ता, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक तंत्र की जटिल सच्चाइयों को उजागर करती है। यह किताब सिर्फ घटनाओं का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक ऐसी पत्रकारिक यात्रा है, जो बताती है कि सत्ता के गलियारों में कैसे फैसले होते हैं, किस तरह घोटालों की गूंज लोकतंत्र के स्तंभों को हिलाती है और कैसे जनता की उम्मीदें राजनीतिक समीकरणों में गुम हो जाती हैं।
किताब की शुरुआत बिहार विभाजन और झारखंड गठन से होती है, जिसमें झारखंड आंदोलन की पृष्ठभूमि, संघर्ष और अंतत: राज्य निर्माण की राजनीतिक खींचतान को विस्तार से बताया गया है। यह अध्याय दिखाता है कि कैसे राजनीतिक समीकरणों के चलते वरिष्ठ नेता कड़िया मुंडा मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचते-पहुंचते रह गये और बाबूलाल मरांडी झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बन गये।
दूसरा अध्याय पशुपालन घोटाला और लालू प्रसाद बिहार की राजनीति के सबसे बड़े भ्रष्टाचार की कहानी कहता है। इसमें बताया गया है कि किस तरह करोड़ों रुपये सरकारी खजाने से फर्जी बिलों और घोटालों के जरिये निकाले गये और किस तरह इस घोटाला से बिहार की राजनीति का चेहरा बदल गया।
तीसरा अध्याय लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के रोचक किस्से बिहार की सत्ता के दिलचस्प और कभी-कभी हास्यपूर्ण पहलुओं को सामने लाता है। इसमें सत्ता के भीतर के कई ऐसे किस्से हैं जो राजनीति के मानवीय और नाटकीय दोनों रूपों को दिखाते हैं।
चौथा अध्याय सचिवालय का सच और रिपोर्टिंग की यात्रा लेखक की पत्रकारिक दृष्टि का परिचायक है। यह अध्याय सरकारी फाइलों, प्रशासनिक गड़बड़ियों और जमीनी रिपोर्टिंग के अनुभवों से भरा है।
इसके बाद पांचवां अध्याय में बिहार के घोटालों से नहीं सीख लिया झारखंड ने में बताया गया है कि कैसे झारखंड ने बिहार की गलतियों को दोहराया। नये राज्य में भ्रष्टाचार, गुप्त फंड के दुरुपयोग और सत्ता की राजनीति ने जनता की उम्मीदों को धूमिल कर दिया। गुप्त फंड का गुप्त उपयोग, खान और उद्योग, और शराब पर खेल जैसे अध्याय सत्ता और व्यवसाय के गठजोड़ को उजागर करते हैं। ये दिखाते हैं कि किस तरह प्राकृतिक संसाधनों और योजनाओं को निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया गया।
पानी के पाइप में बह रहा भ्रष्टाचार अध्याय में जलापूर्ति योजनाओं में हुए घोटालों का खुलासा किया गया है, जबकि रघुवर दास, मैनहर्ट और राज्यपाल का संयोग सत्ता के ऊपरी स्तर पर चल रही अदृश्य राजनीतिक ताकतों का चित्रण करता है। अंतिम 11 वां अध्याय द गार्डियंस बाबूलाल से हेमंत तक झारखंड की राजनीतिक यात्रा को समेटता है। इसमें राज्य के मुख्यमंत्रियों की भूमिका, उनके फैसले, और विकास बनाम राजनीति की जंग का सटीक विश्लेषण है।
कुल मिलाकर, नीले आकाश का सच बिहार और झारखंड की राजनीति की मिट्टी से निकली वह कहानी है जिसमें सत्ता की सच्चाई, घोटालों की गंध, और उम्मीदों के नीले आकाश की तलाश एक साथ चलती है। यह किताब पत्रकारिता, राजनीति और समाज के उन अदृश्य सूत्रों को जोड़ती है जिनसे भारत के लोकतंत्र की असल तस्वीर उभरती है।
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