एबीएन सोशल डेस्क। आज प्रातःकालीन वंदनीय वाणी में गुरुदेव ने जैन दर्शन के मूल तत्व सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र की महिमा का अत्यंत सरल और गूढ़ विवेचन किया। पहले दर्शन, फिर ज्ञान, फिर चरित्र, मुनी श्री ने स्पष्ट कहा - आध्यात्मिक उन्नति का क्रम उल्टा नहीं होता पहले सम्यक दर्शन होता है सही दृष्टिकोण, सही श्रद्धा। उसके बाद सम्यक ज्ञान प्रकट होता है। वस्तु को जैसी है वैसी जानना। जब ज्ञान शुद्ध हो जाता है, तब चरित्र स्वतः सम्यक बन जाता है।
यदि दृष्टि ही विकृत हो, तो ज्ञान भी विकृत होगा और आचरण भी असंतुलित रहेगा। इसलिए जैन धर्म में सबसे पहले श्रद्धा की शुद्धि पर बल दिया गया है। उन्होंने दर्पण का उदाहरण से बताया की आत्मा का स्वभाव किस प्रकार का होता हैं। गुरुदेव ने अत्यंत सुंदर उदाहरण दिया दर्पण का कार्य छवि को झलकाना नहीं है, बल्कि उसका स्वभाव ही ऐसा है कि जो उसके संपर्क में आता है, वह प्रतिबिंबित हो जाता है।
इसी प्रकार आत्मा का स्वभाव शुद्ध, चेतन और ज्ञानमय है। परंतु जब वह कर्मों के संपर्क में आती है, तो उसकी शुद्धता ढँक जाती है। दर्पण स्वयं गंदा नहीं होता, उस पर धूल जम जाती है। आत्मा अशुद्ध नहीं होती, उस पर कर्मों का आवरण आ जाता है। इसलिए हमें दर्पण को तोड़ना नहीं, बल्कि धूल हटानी है। उसी प्रकार आत्मा को बदलना नहीं, कर्मों को क्षीण करना है।
यह देह नहीं, यह नाम नहीं, यह संबंध नहीं, इन सब से परे जो चेतना है, वही आत्मा स्वरूप मैं हूँ। फिर प्रश्न आता है मैं कौन हूँ? क्या मैं शरीर हूँ? क्या मैं पद-प्रतिष्ठा हूँ? या मैं शुद्ध, अनंत ज्ञान-स्वरूप आत्मा हूँ? जब यह विवेक जागता है, तब तीसरा प्रश्न उठता है मुझे क्या करना है? और यहीं से साधना प्रारंभ होती है । जैन आगमों में कहा गया है कि मोक्ष का मार्ग सम्यक्त्रय से ही प्रशस्त होता है।
सही श्रद्धा, सही ज्ञान, सही आचरण। यदि श्रद्धा दृढ़ है, तो ज्ञान प्रकाशित होगा। यदि ज्ञान प्रकाशित है, तो आचरण पवित्र होगा। और जब आचरण पवित्र होगा, तब आत्मा का स्वभाव स्वतः प्रकट होगा। आज के प्रवचन का सार यही है हम बाहर की दुनिया को बदलने में लगे हैं, परंतु वास्तविक साधना भीतर की है।
दर्पण को साफ कीजिए, प्रतिबिंब स्वयं उज्ज्वल होगा। आत्मा को कर्म मल से मुक्त कीजिए, अनंत ज्ञान, अनंत दर्शन और अनंत सुख स्वयं प्रकट हो जाएगा। प्रवचन के दौरान मंत्री जीतेन्द्र छाबड़ा, अध्यक्ष प्रदीप बाकलीवाल, प्रमोद झाँझरी, विनोद झाँझरी , धर्मचन्द पाटोदी, के अलावा कई श्रद्धालु उपस्थित थे।यह जानकारी मीडिया प्रभारी राकेश काशलीवाल ने दी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse