टीम एबीएन, हजारीबाग। शहर में मांस-मछली की करीब 50 दुकानें सड़कों और चौक-चौराहों के किनारे पर सजी हैं लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि किसी भी दुकान के पास मांस काटने और बेचने का लाइसेंस नहीं है। 2016-17 से ही किसी भी दुकानदार ने न तो नवीकरण कराया है और न ही लाइसेंस लिया है, फिर भी शहर में खुलेआम बकरे और मुर्गे कट रहे हैं और धड़ल्ले से बिक रहे हैं। इनसे निकलने वाली गन्दगी भी सड़क पर बहा दी जाती है जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इससे सम्बंधित व्यापार करने वाले गन्दगी फैला कर मजे से व्यवसाय कर रहे है। दुकान के संचालकों पर कोई असर नहीं : शहर के हीरा बाग चौक, मिशन अस्पताल, जगलाल चौक, लक्ष्मी टाल्कीस सहित कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी कर खुलेआम सड़कों पर मांस बेचा जा रहा है। इन दुकानों पर मांस को बिना ढके टांगा जाता है, जिन पर मक्खियां भिनभिनाती हैं। संक्रमण का खतरा बना रहता है। नियमों के अनुसार, बिना अनुज्ञप्ति मांस की दुकान पर रोक है। साथ ही खुले में तो बिल्कुल भी इसकी बिक्री नहीं की जा सकती है। धड़ल्ले से चल रही ऐसी दुकानों के संचालकों पर कोई असर नहीं दिखता। बिना किसी खौफ के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए मांस बिक्री का कारोबार चल रहा है। वहीं इन रास्तों से रोजाना गुजरने वाले तमाम वरीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मानो इससे मुंह फेर लेते हैं। क्या है नियम : प्रिवेंशन आॅफ क्रूएल्टी टू एनिमल एक्ट 1960 के तहत अवैध तरीके से मांस की दुकान लगाना और पशुओं की हिंसा करना प्रतिबंधित है। यहां तक कि इनका गलत तरीके से ढोना भी अपराध की श्रेणी में आता है। इस क्रूरता को रोकने के लिए पशु चिकित्सा विभाग, नगर पर्षद और पुलिस प्रशासन सभी को शक्तियां दी गयी हैं, लेकिन कोई इसका प्रयोग नहीं कर रहा। बिना लाइसेंस के चल रहीं दुकानों को नगर पर्षद कभी भी बंद करा सकता है या फुटपाथ से हटा सकता है।
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