टीम एबीएन, रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री और विधायक सरयू राय ने कहा है कि झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वास्तव में 1932 खतियान आधारित स्थानीयता झारखंड में लागू करना चाहते हैं तो वे इस बारे में 2002 में झारखंड हाईकोर्ट के 5 जजों की बेंच के फ़ैसला को चुनौती दें। राय ने यहां कहा कि 11 फरवरी 2007 को सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच का फ़ैसला है कि जिस मामले में न्यायालय का निर्णय हुआ है उसे 9 वीं अनुसूची में डालने पर न्यायालय उसकी न्यायिक समीक्षा करेगा। राय ने कहा कि झारखंड सरकार की कैबिनेट द्वारा हाल में पारित 1932 खतियान आधारित स्थानीयता के निर्णय को केन्द्र सरकार चाहे भी तो उसे न्यायिक समीक्षा के बिना संविधान की 9वीं अनुसूची में नहीं डाला जा सकता है। भले ही यह निर्णय झारखंड विधानसभा से अधिनियम के रूप में पारित क्यों न हो जाये।
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