टीम एबीएन, लोहरदगा। श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचिका जया किशोरी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा के प्रसंग विस्तार से सुनाए। लोहरदगा के साहू परिवार और जिला क्रिकेट एसोसिएशन लोहरदगा के तत्वावधान में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन ललित नारायण स्टेडियम में हजारों भागवत प्रेमियों के बीच भारत की प्रसिद्ध कथा वाचिका जया किशोरी कथा का वाचन कर रही हैं छठे दिन श्री कृष्ण और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया जायेगा। श्रीमद्भागवत कथा में कथा ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा के प्रसंग विस्तार से सुनाए। मुख्य यजमान धीरज प्रसाद साहू ने कथा का दीप प्रज्ज्वलित किया। श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन पूज्या जया किशोरी जी के कार्यक्रम स्थल व्यास मंच में आगमन होते हीं भक्तों के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। राज्यसभा सांसद धीरज प्रसाद साहू ने पूज्या जयाकिशोरी जी को अंगवस्त्र प्रदान कर अभिनन्द किया। साहू परिवार ने ठाकुर जी की पूजा अर्चना एवं आरती किया। अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम भजन के साथ श्रीमद्भागवत कथा प्रारंभ की गई। भगवान के गोकुल पहुंचते हीं कंस का कारागार में सैनिक जागते हैं आठवें संतान के रूप में कन्या को देखकर चकित होते हैं, उसे कंस के पास लाया जाता है, कंस जब उसकी हत्या करना चाहता है। कन्या हाथ से छिटककर आसमान से आकाशवाणी करती है अरे दुष्ट तेरा बध करने वाला भगवान गोकुल में है, तेरा अंत निकट है।भगवान कृष्ण के जन्म के छह दिन बाद कंस ने गोकुल में ढूंढ-ढूंढकर नवजात शिशुओं का वध करवाने लगा। कंस ने इसके लिए अपनी मुंह बोली बहन पूतना राक्षसी को भेजा था। पूतना भेष बदलने में माहिर थी और चमत्कारिक भी थी। पूतना में दस हाथियों जितना बल था। पूतना ने कृष्ण को मारने के लिए अपने स्तनों पर हलाहल विष लगा था। श्रीकृष्ण स्तनपान करे ताकि दूध के साथ विष भी अंदर चला जाए और कृष्ण की मौत हो जाए। पूतना ने मनोहर नारी का रूप धारण किया और आकाश मार्ग से सीधा नंदबाबा के महल में गई और सोते हुए कृष्ण को गोद में उठाकर अपना दूध पिलाने लगी। पूतना का मनोहर रूप देखकर यशोदा माता और बलराम की माता रोहिणी भी मोहित हो गए और उनको दूध पिलाने से नहीं रोका। उन्होंने सोचा कि यह स्वर्ग से उतरी देवकन्या है, जो हमारे लाला को देखने के लिए आई है। अन्तर्यामी श्रीकृष्ण सब जान गए और उन्होंने अपने दोनों हाथों से कुच धाम करके उसके प्राण समेत दुग्धपान करने लगे। इससे पूतना चिल्लाने लगी और बाल गोपाल को हटाने लगी लेकिन भगवान हटे नहीं। वह इतनी परेशान हो गई कि वह अपने असली रूप में आकर चारों तरफ चिल्लाने लगी। इससे गोकुलवासी भयभीत हो गए। पूतना अपने राक्षसी स्वरूप में ही पृथ्वी पर गिर गई और जब गिरने की आवाज सुनाई दी तब नंदबाबा, यशोदा माता और रोहिणी उसके पास दौड़े-दोड़े गईं। वहां जाकर देखा कि कृष्ण भयंकर राक्षसी के स्तनपान कर रहे थे। उन्होंने तुरंत बच्चे को उठाया और अपने पास रखकर बोले कि आज लल्ला की रक्षा भगवान ने खुद की है। भगवान के हाथों वध होने के बाद पूतना को लेने के लिए बैकुंठ धाम से विमान आया, जो उसे विष्णु लोक ले गया और वह जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो गई। पूज्या जया किशोरी ने श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को सुन्दर भजनों के द्वारा प्रस्तुत किया। हठ पकड़े नंदलाला, मैया री मोहे चंदा ला दे, चँदा ला दे चँदा ला दे चँदा ला दे, भजन के गाते हीं भक्तजन पंडाल में हीं भगवान के भक्ति में लीन होकर नृत्य करने लगे। आज पांचवे दिन भगवान के भक्ति में एक से लेकर एक भजन गए गए। जिसमें नंद भवन में उड़ रही धूल धूल मोहे प्यारी लगे नंदभवन में उड़ रही धूल, धूल मोहे प्यारी लगे... राधिका गोरी से ब्रिज की छोरी से, मैया करादे मेरो ब्याह, उम्र तेरी छोटी है नजर तेरी खोटी है, कैसे करा दु तेरो ब्याह। आदि भजन प्रस्तुत किया गया। कथा में गोवर्धन पर्वत की कृत्रिम आकृति झांकी के माध्यम से दर्शाई गई। भगवान श्रीकृष्ण को 56 भोग लगाए गए। व्यासपीठ से जया किशोरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म और सत्य की पुन: स्थापना के लिए द्वापर युग में अवतार लिया। इसी उद्देश्य को पूरा करते हुए उन्होंने बाल्य अवस्था में ही कालीय नाग का मर्दन करके यमुना जी को पवित्र किया।पूतना और बकासुर आदि मायावी शक्तियों का अंत किया। बृज भूमि में आतंक के पर्यायी कंस मामा का वध करके अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव और नाना महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया। गोवर्धन पूजा में प्रकृति की पूजा का उल्लेख किया गया। गायकों द्वारा सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। शुक्रवार को जया किशोरी ने श्री कृष्ण की सुंदर बाल लीलाओं के प्रसंग सुनाते हुए बतलाया कि भगवान श्री कृष्ण गोपियों के प्रेम में वशीभूत होकर उनकी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए गोपियों के घर माखन चोरी करते थे। गोकुल वासी श्रीकृष्ण के प्रेरणा से गोबर्धन पर्वत की पूजा करने लगे जिससे इंद्र देव नाराज हो गए और अकाल कर दिए। भगवान श्री कृष्ण व ब्रजवासी एक-दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। उन्होंने सूखे के हालात से जूझते ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने हेतु प्रेरित करने और इंद्र के प्रकोप पर गोवर्धन पर्वत को श्री कृष्ण द्वारा अंगुली पर उठाने का रोचक प्रसंग सुनाया गया। गोवर्धन पूजा से आक्रोशित इंद्र देव के प्रकोप श्रीकृष्ण लीला को जया किशोरी ने कथा वर्णन से व्यक्त किया तो वहीं नाट्य मंडली के कलाकारों ने इस प्रसंग की सजीव झांकी भी सजाई। पांचवें दिन का माहौल पूरी तरह से गोकुल जैसा नजर आया। श्रीकृष्ण की जीवंत झांकी में सजे पात्र ने जया किशोरी के वर्णन के साथ-साथ अंगुली पर प्रतीकात्मक गोवर्धन पर्वत को जैसे ही उठाया, वैसे ही समूचा परिसर जयश्री कृष्ण के जयकारों से गूंज उठा। भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग करा कर एवं महा आरती के साथ आज का कथा संपन्न हुई। शुक्रवार को जया किशोरी ने श्रीमद्भागवत कथा कार्यक्रम में झारखंड सरकार के वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव उनके पुत्र स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता, सांसद धीरज प्रसाद साहू रांची की पूर्व सांसद स्व शिव प्रसाद साहू की धर्मपत्नी शेफाली साहू, साहू परिवार की अरुणा साहू, सविता साहू, कोलकाता की सरिता जायसवालन, मनु साहू, राहुल साहू, संदीप साहू, भावना साहू, वंदना साहू, हर्षित साहू, रुचि साहू, राजश्री साहू, हंसा साहू, शेरी मुनी साहू, रितेश साहू, रांची के प्रसिद्ध व्यवसायी नवीन गुप्ता, दिनेश साहू, मदन मोहन शर्मा, सच्चिदानंद चौधरी, दिल्ली भाजपा की वरिष्ठ नेता राजश्री कुमार, दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता अजय महासेठ, शालिनी महासेठ, रांची सर्जन डॉ अनूप साहू, मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता, रांची की रेणुका मिश्रा, कंचन गुप्ता, अशोक यादव, ओमप्रकाश सिंह, लोहरदगा जिला क्रिकेट एसोसिएशन के दर्जनों कार्यकर्ता आयोजन समिति के वालंटियर समेत करीब 10,000 भागवत प्रेमी शुक्रवार की कथा का भरपूर आनंद उठाया। अत्यधिक भीड़ होने के कारण लोगों ने जया किशोरी की कथा का श्रवण एलसीडी स्क्रीन में बारीकी से सुना और समझा सुरक्षा के चाक-चौबंद व्यवस्था की गई है। दो मंत्रियों और वीआईपी के आने से स्टेडियम परिसर छावनी में बदल गया था।
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