एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरेशिया के सबसे ऊंचे सक्रिय ज्वालामुखी क्लाइयुचेवस्काया सोपका पर चढ़ने के दौरान हुई एक दुर्घटना में शनिवार को कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक खराब मौसम के कारण बचावकर्मी क्लाइयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी के छह अन्य पर्वतारोहियों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दो पर्वतारोही समुद्र तल से 3,300 मीटर (10,827 फीट) ऊपर एक शिविर में और चार अन्य 4,000 मीटर पर एक तम्बू में शरण लिए हुए हैं। बीबीसी की खबर के मुताबिक स्थानीय मीडिया का कहना है कि 12 लोगों के पर्वतारोहियों के एक समूह (जिसमें दो गाइड शामिल थे) ने मंगलवार को 4,754 मीटर शिखर पर चढ़ना शुरू किया। चढ़ाई करने के चार दिन बाद शनिवार को चार पर्वतारोही लगभग 4,000 मीटर ऊंचाई चढ़ने के बाद अचानक फिसलने लगे और गिर कर मारे गए। इसके कुछ समय बाद दो और पर्वतारोहियों के गिरने से मौत हो गई। बताया जाता है कि गाइडों में से एक का पैर टूट गया था और शेष पर्वतारोहियों की स्थिति का तुरंत पता नहीं चल पाया है। मीडिया रिपोर्ट में कामचटका क्षेत्र के अभियोजक के कार्यालय का हवाला देते हुए कहा गया कि पर्वतारोही क्लाइयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी के शीर्ष पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह हादसा 4,750 मीटर की ऊंचाई वाले पर्वत शिखर से लगभग 500 मीटर नीचे हुआ। रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी पर्वतारोही रूसी थे। इस हादसे के कारणों का अब तक पता नहीं चल सका है। गौरतलब है कि रूस के सुदूर उत्तर पूर्व में कामचटका प्रायद्वीप सक्रिय और निष्क्रिय ज्वालामुखियों, गर्म झरनों और वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है। इयुचेवस्काया सोपका ज्वालामुखी को कुछ स्वदेशी समुदायों द्वारा बेहद पवित्र माना जाता है और इस पर चढ़ने को वे अपशकुन मानते हैं।
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