टीम एबीएन, जमशेदपुर/रांची। टाटा स्टील जूलॉजिकल पार्क की लापरवाही और बाढ़ में डूबने से हुई तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग ने जू के निदेशक विपुल चक्रवर्ती पर मुकदमा दर्ज कराया गया है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में जू के निदेशक पर वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब जानवरों की रखरखाव में लापरवाही के मामले में वन विभाग ने कार्रवाई की है। सहायक वन संरक्षक अमित कुमार चौधरी के बयान पर मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें बताया गया है कि जू में लापरवाही बरती जा रही है। इसके चलते वन्य प्राणियों पर खतरा है। जू में बाढ़ आई तो तेंदुए को सुरक्षित निकालने की कोशिश भी नहीं की गई, इसके चलते तेंदुए की डूबने से मौत हो गई है। निदेशक पर वाइल्ड लाइफ एक्ट 1972 की धारा 9, 39, 51 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। नर तेंदुए की मौत के बाद वन विभाग की टीम ने टाटा जू की जांच की थी जिसमें लापरवाही की बात सामने आई थी। नर तेंदुआ (मिथुन) की मौत मामले में वन विभाग की टीम ने चाईबासा डीएफओ डॉ सत्यम कुमार के नेतृत्व में जांच की थी। इसमें जू प्रबंधन की लापरवाही को तेंदुए की मौत का कारण माना गया। बाढ़ की सूचना के बावजूद भी जू प्रबंधन ने तेंदुआ को शिफ्ट नहीं किया था। जू प्रबंधन जानता था कि तेंदुआ लंगड़ा रहा था, इसके बावजूद भी उसे बाड़े में ही छोड़ दिया गया, इसके चलते तेंदुआ की मौत पानी में डूबने से हो गई थी। पार्क में वन्य प्राणियों के रखरखाव पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। बाड़े की शिफ्टिंग और जानवरों की सुविधा बढ़ाने के लिए वन विभाग के निर्देश के बावजूद भी सुधार नहीं किया गया। वर्ष 2018 में टाटा जू में दो बाघों की मौत हो गई थी। इसके बाद वन विभाग और वाइल्ड लाइफ वार्डन सेंट्रल जू अथॉरिटी ने टाटा जू को चेतावनी दी थी कि सुधार लायें लेकिन ऐसा नहीं हुआ और फिर से एक तेन्दुआ की मौत हो गयी।
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