टीम एबीएन, रांची। झारखंड में की महिलाएं अब असुरक्षित महसूस करने लगी हैं। महिलाओं के सुरक्षित नहीं होने का दावा करते हुए भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को जानना चाहा कि एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से जिंदा जलाए जाने से हुई 12वीं कक्षा की एक छात्रा की मौत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुप्पी क्यों साधे हुए हैं। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और बाबूलाल मरांडी सहित भाजपा के अन्य नेताओं ने इस जघन्य अपराध में शामिल व्यक्ति के खिलाफ फास्ट ट्रैक अदालत में मुकदमा चलाकर उसे सजा दिलाने की मांग की। हालांकि, सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आरोप लगाया कि भाजपा मामले को लेकर सांप्रदायिक राजनीति करने का प्रयास कर रही है और कहा कि सरकार भी इस घटना में शामिल व्यक्ति के लिए कड़ी सजा चाहती है। भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दास ने कहा, एक युवती को जिंदा जलाकर मार डाला गया, लेकिन मुख्यमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं। क्या यह तुष्टिकरण की नीति नहीं है? हमने रांची हिंसा मामले में आरोपी नदीम (अंसारी) को एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाते हुए देखा ताकि सरकारी खर्च पर उसका बेहतर इलाज हो सके, जबकि झुलसी 19 साल की युवती का ठीक से ख्याल नहीं रखा गया। भाजपा से निलंबित पार्टी प्रवक्ता नुपुर शर्मा द्वारा पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित तौर पर की गई टिप्पणी को लेकर 10 जून को रांची में कुछ जगहों पर हिंसा भड़क गई थी। छात्रा की हत्या के सिलसिले में दास ने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा और निकट परिजन को सरकारी नौकरी देने की मांग की। गौरतलब है कि 23 अगस्त को दुमका में एकतरफा प्रेम के मामले में आरोपी शाहरुख ने युवती के कमरे में खिड़की से पेट्रोल उड़ेलकर आग लगा दी। इस घटना में बुरी तरह झुलस गई युवती की रविवार को यहां स्थित एक अस्पताल में मौत हो गई।
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