एबीएन सेंट्रल डेस्क। तकनीक के इस युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के जरिए डीपफेक और एआई कंटेंट से लोगों को जाल साज गुमराह कर रहे हैं। इसे लेकर देश में पहली बार एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से तैयार होने वाले विज्ञापनों के लिए अलग नियम की तैयारी शुरू हो गयी है। विज्ञापन नियामक संस्था एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल आॅफ इंडिया (एएससीआई) ने इसका मसौदा जारी किया है।
विज्ञापन नियामक संस्था ने कहा किसी विज्ञापन में एआई की मदद से किसी सेलिब्रिटी की आवाज या चेहरा बनाया गया है, प्रोडक्ट का डेमो तैयार किया गया है, वर्चुअल इन्फ्लुएंसर दिखाया गया है या ऐसा दृश्य है जो उपभोक्ता के खरीदी के फैसले पर असर डाल सकता है, तो उस पर साफ तौर पर बताना होगा कि यह एआई से बनाया गया है। हालांकि, केवल टैग लगा देना हर मामले में पर्याप्त नहीं होगा। फर्जी डॉक्टर, नकली प्रशंसापत्र (टेस्टिमोनियल), बढ़ा-चढ़ाकर दिखाये गये नतीजे या बिना अनुमति किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरा इस्तेमाल करने वाले एआई विज्ञापनों को सीधे खारिज किया जायेगा।
संसदीय समिति पहले ही उपभोक्ताओं को एआई आधारित ठगी से बचाने के लिए सख्त नियम बनाने की सिफारिश कर चुकी है। सुझावों में तकनीकी विशेषज्ञों ने कहा है कि स्क्रीन पर छोटे-से एआई लेबल से काम नहीं चलेगा। उन्होंने डिजिटल ट्रैकिंग, वाटरमार्क, कंपनियों की जवाबदेही और नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की भी सिफारिश की है। मालूम हो, एएससीआई ने मसौदे पर सुझाव मांगे थे। ये सरकार को मिल चुके हैं। इन्हीं के आधार पर अंतिम दिशा-निर्देश जारी किये जायेंगे।
इससे पहले केंद्र सरकार सोशल मीडिया पर डीपफेक और एआई कंटेंट की पहचान तथा शिकायत मिलने के तीन घंटे के भीतर उसे हटाने के नियम बना चुकी है। अब एआई से तैयार विज्ञापनों के लिए दिशा-निर्देश लाये जा रहे हैं। इससे यह तय होगा कि कौन-से विज्ञापन टैग से चल सकेंगे और किन पर रोक लगेगी।
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