श्याम प्रभु का फाल्गुन मेला महोत्सव आस्था, समर्पण और भक्ति का महापर्व

 

श्री श्याम प्रभु का उत्सव समाज में समर्पण, त्याग, परोपकार और सच्ची भक्ति का है प्रतीक: संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट एवं श्री श्याम ध्वजा पदयात्रा समिति के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि हिंदू धर्म में श्रद्धा और विश्वास का अद्भुत केंद्र माने जाने वाले श्री खाटू श्याम जी का फाल्गुन मेला महोत्सव देशभर में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष यह पावन उत्सव 21 फरवरी से 28 फरवरी तक मनाया जा रहा है, तथा फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी एवं द्वादशी 28 फरवरी के दौरान विशेष रूप से मनाया जायेगा। 

राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर में इस अवसर पर विशाल मेले का आयोजन होता है, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु श्याम प्रभु के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्री श्याम प्रभु महाभारत काल के वीर बर्बरीक थे, जो घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे। उन्होंने युद्ध में हारने वाले पक्ष का साथ देने का संकल्प लिया था। उनकी शक्ति से चिंतित होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उनका शीश दान में मांगा। 

बर्बरीक ने सहर्ष अपना शीश अर्पित कर दिया। उनकी अद्वितीय वीरता और त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें श्याम नाम देकर कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का वरदान दिया। ऐसी मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल एकादशी के दिन खाटू धाम में उनका प्राकट्य हुआ था, इसी कारण इस तिथि को विशेष उत्सव मनाया जाता है। यह महोत्सव त्याग, बलिदान और सच्ची भक्ति का प्रतीक है। 

फाल्गुन मेला महोत्सव  केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भक्ति का महासागर है।मंदिर को भव्य रूप से फूलों और रोशनी से सजाया जाता है। निशान यात्रा (ध्वज यात्रा) का विशेष महत्व होता है, जिसमें भक्त पैदल यात्रा कर ध्वज अर्पित करते हैं। अखंड कीर्तन, भजन संध्या और रात्रि जागरण का आयोजन होता है। लाखों श्रद्धालु हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा के जयघोष के साथ प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

राजस्थान के अलावा दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार सहित देश के विभिन्न राज्यों में भी श्याम भक्त मंडलियों द्वारा भव्य शोभायात्राएं और भजन संध्याएं आयोजित की जाती हैं। श्री श्याम प्रभु का फाल्गुन मेला उत्सव समाज में समर्पण, त्याग और परोपकार की भावना जागृत करता है। यह पर्व सिखाता है कि सच्ची भक्ति में अहंकार का स्थान नहीं होता। बाबा श्याम को हारे का सहारा कहा जाता है, क्योंकि वे दुखी, निराश और पीड़ित जनों के संरक्षक माने जाते हैं।

समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना, आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना तथा सेवा भावना को प्रोत्साहित करना है। फाल्गुन मेला महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का विराट संगम है। इस वर्ष भी यह पावन पर्व श्रद्धालुओं के लिए नई ऊर्जा, आशा और सकारात्मकता लेकर आयेगा। श्री श्याम प्रभु का यह संदेश सदैव प्रेरित करता है कि जीवन में सच्ची निष्ठा, त्याग और विश्वास ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। जय श्री श्याम के उद्घोष के साथ यह महापर्व पूरे देश में भक्ति और उत्साह का वातावरण निर्मित करता है। 

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