गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र का गौरवशाली उत्सव : संजय सर्राफ

 

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के संयुक्त महामंत्री संजय सर्राफ ने कहा है कि भारतवर्ष में 26 जनवरी का दिन अत्यंत गौरव, गर्व और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है। इस दिन को हम गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं। यह केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान की सर्वोच्चता और नागरिकों के अधिकारों का उत्सव है। 

26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ और भारत एक सम्पूर्ण प्रभुत्व-संपन्न गणराज्य बना। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, परंतु उस समय देश का शासन ब्रिटिश काल के अधिनियमों के आधार पर चल रहा था। स्वतंत्र भारत को अपनी आत्मा, संस्कृति और लोकतांत्रिक सोच के अनुरूप एक संविधान की आवश्यकता थी। 

इसी उद्देश्य से संविधान सभा का गठन किया गया, जिसके अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद तथा प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे। लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन के अथक परिश्रम के बाद संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे लागू किया गया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

26 जनवरी की तिथि का विशेष महत्व है। इसी दिन वर्ष 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी।इसलिए संविधान लागू करने के लिए भी इसी तिथि को चुना गया, ताकि स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को सम्मान दिया जा सके। गणतंत्र दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों को यह याद दिलाना है कि भारत का शासन जनता द्वारा जनता के लिए और जनता का है।

यह दिन हमें संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है। साथ ही यह हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक करता है। राष्ट्रीय स्तर पर समारोह हर वर्ष नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर भव्य गणतंत्र दिवस परेड का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है और देश की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता तथा राज्यों की झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। 

वीरता पुरस्कारों से सम्मानित वीर जवानों और बच्चों को सम्मानित किया जाता है। यह परेड भारत की एकता, अखंडता और शक्ति का सजीव प्रदर्शन होती है,गणतंत्र दिवस केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। यह हर भारतीय के लिए आत्ममंथन का अवसर है, क्या हम संविधान का सम्मान कर रहे हैं, क्या हम अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं, और क्या हम एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभा रहे हैं? 

26 जनवरी का दिन हमें यह स्मरण कराता है कि भारत केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों और लोकतंत्र की जीवंत भावना है। गणतंत्र दिवस हमें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने, संविधान के आदर्शों को जीवन में उतारने और भारत को एक सशक्त, समृद्ध एवं समरस राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देता है।

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