मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के अध्यक्ष/सचिव के साथ उपायुक्त करेंगे बैठक

 

19 मार्च को अपराह्न 1:30 बजे से समाहरणालय सभागार में होगी बैठक

 

निर्वाचन आयोग के स्तर से निर्गत महत्वपूर्ण दिशा-निदेशों से कराया जाएगा अवगत, महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर भी होगा विचार-विमर्श

कानूनी ढांचे के भीतर चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल एवं मान्यता प्राप्त राज्य राजनीतिक दल के अध्यक्ष/सचिव को विचार-विमर्श के लिए आमंत्रित किया गया है। निर्वाचन आयोग के निदेश के आलोक में पलामू के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- उपायुक्त शशि रंजन द्वारा 19 मार्च 2025 को अपराह्न 01:30 बजे से समाहरणालय के ब्लॉक ए के सभाकक्ष में मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल एवं मान्यता प्राप्त राज्य राजनीतिक दल के अध्यक्ष/सचिव के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली के स्तर से निर्गत महत्वपूर्ण दिशा-निदेशों से अवगत कराया जायेगा। साथ ही महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विचार-विमर्श होगा।

विदित हो कि भारत के चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य राजनीतिक दलों से 30 अप्रैल 2025 तक ERO, DEO या CEO के स्तर पर किसी भी अनसुलझे मुद्दे के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। राजनीतिक दलों को जारी एक व्यक्तिगत पत्र में आयोग ने स्थापित कानून के अनुसार चुनावी प्रक्रियाओं को और मजबूत करने के लिए, पारस्परिक रूप से सुविधाजनक समय पर पार्टी अध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ सदस्यों के साथ बातचीत की परिकल्पना की है। उक्त निदेश के आलोक में पलामू के जिला निर्वाचन पदाधिकारी-सह- उपायुक्त शशि रंजन द्वारा बैठक आयोजित की जा रही है।

इससे पहले 4 एवं 5 मार्च 2025 को भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारियों के सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त, भारत निर्वाचन आयोग, नई दिल्ली ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के सीईओ, डीईओ और ईआरओएस को राजनीतिक दलों के साथ नियमित बातचीत करने, ऐसी बैठकों में प्राप्त किसी भी सुझाव को पहले से मौजूद कानूनी ढांचे के भीतर सख्ती से हल करने का निर्देश दिया है। 

आयोग ने राजनीतिक दलों से विकेंद्रीकृत जुड़ाव के इस तंत्र का सक्रिय रूप से उपयोग करने का भी आग्रह किया है। राजनीतिक दल संविधान और चुनावी प्रक्रियाओं के सभी पहलुओं को कवर करने वाले वैधानिक ढांचे के अनुसार आयोग द्वारा पहचाने गए 28 हितधारकों में से एक प्रमुख हितधारक हैं। 

राजनीतिक दलों को लिखे अपने पत्र में आयोग ने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951; मतदाताओं का पंजीकरण नियम, 1960; चुनाव संचालन नियम, 1961; माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और भारत के चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर जारी निर्देश, मैनुअल और हैंडबुक (ईसीआई वेबसाइट पर उपलब्ध) ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए एक विकेंद्रीकृत, मजबूत और पारदर्शी कानूनी ढांचा स्थापित किया है।

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