एबीएन सेंट्रल डेस्क। सरकार ने अपनी महत्वकांक्षी योजना नमामी गंगे कार्यक्रम-एनजीपी को एक साल आगे खिसकाते हुए अगले वर्ष मार्च तक बढ़ा दिया है। जल शक्ति मंत्रालय ने यह जानकारी देते हुए शुक्रवार को बताया कि सरकार ने गंगा तथा उसकी सहायक नदियों के संरक्षण के लिए जून 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम एक एकीकृत संरक्षण मिशन की शुरुआत की थी।
सरकार ने 20,000 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ इसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम के रूप में अनुमोदित किया था और इसका उद्देश्य गंगा के प्रदूषण में प्रभावी कमी लाना और इसका संरक्षण करना था। मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय गंगा योजना को 2025-26 के लिए 3400 करोड़ रुपये का वित्तीय परिव्यय आवंटित किया गया है और इस निवेश का मसकद सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाना, गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता में सुधार करना और इसके संरक्षण के साथ ही 2025 तक निर्धारित स्नान मानकों को प्राप्त करने के लिए औद्योगिक कचरे के निर्वहन को विनियमित करना है।
इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य निर्मल गंगा था जिसके तहत नदी में प्रदूषण के स्रोतों का पता लगाना और उन्हें कम करना, पारिस्थितिकी तथा प्रवाह में सुधार लाकर इसे अविरल गंगा बनाना एवं इसकेनिरंतर प्रवाह को बढ़ाना तथा जन-नदी संपर्क यानी इसकी स्वच्छता के लिए सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता बढ़ाकर लोगों और नदी के बीच गहरा संबंध विकसित करना है।
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