टीम एबीएन, रांची। विश्व हिंदू परिषद सेवा विभाग एवं श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि मौनी अमावस्या का पर्व हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है। यह माघ माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी यानी बुधवार को है। इस दिन मौन व्रत रहकर स्नान करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं।
इस दिन भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ अमावस्या के दिन संगट तट और गंगा पर देवी-देवताओं का वास होता है। इस समय प्रयागराज में महाकुंभ भी चल रहा है। मौनी अमावस्या पर महाकुंभ में अमृत स्नान भी होगा। महाकुंभ के अमृत स्नान के समय में गंगा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद ही शुभ रहता है।
जो व्यक्ति इस समय गंगा स्नान या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।महाकुंभ के दौरान अमृत स्नान करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। जो आत्म- निर्माण, साधना और मानसिक शांति का प्रतीक है। इस दिन विशेष रूप से मौन व्रत रखने की परंपरा है, जिससे व्यक्ति अपने भीतर की आंतरिक शांति और संतुलन की ओर अग्रसर होता है।
वहीं, प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ मेला इस दिन और भी विशेष बन जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान करने के लिए जुटते हैं। प्रयागराज जिसे त्रिवेणी संगम के नाम से भी जाना जाता है, यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का मिलन होता है। यह स्थान हिंदू धर्म के चार प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां हर 12 वर्षों में महाकुंभ मेला आयोजित होता है।
इस दिन लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में स्नान कर अपने पापों से मुक्ति प्राप्त करने का विश्वास रखते हैं। खासकर मौनी अमावस्या के दिन कुंभ मेला अधिक श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का महत्व अत्यधिक है। माना जाता है कि इस दिन गंगा-यमुनाजी में स्नान करने से व्यक्ति के सारे पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
साथ ही, इस दिन विशेष रूप से मौन रहकर साधना, ध्यान और पूजा करने का महत्व भी है। श्रद्धालु इस दिन मौन रहकर आत्म-निरीक्षण करते हैं और अपनी मानसिक शांति के लिए ध्यान करते हैं। यह दिन आत्मा की शुद्धि का होता है, जहां व्यक्ति अपने भीतर की आवाज को सुनकर ईश्वर से जुड़ने की कोशिश करता है।महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में स्नान, पूजन और तर्पण के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान भी बड़े धूमधाम से होते हैं।
यह पर्व न केवल एक धार्मिक उत्सव है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक संगम भी है, जहां देश-विदेश से लाखों लोग एकत्रित होते हैं। यहां साधु-संतों, योगियों और भक्तों की अनूठी साधना देखने को मिलती है, जो पूरी दुनिया को शांति और प्रेम का संदेश देती है। प्रयागराज में महाकुंभ स्नान का आयोजन न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक पुण्य अवसर है, बल्कि यह समाज में धार्मिक सौहार्द और एकता का प्रतीक भी बनता है।
इस दिन विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति की प्राप्ति होती है। वहीं, समाज के प्रत्येक वर्ग के लोग इस अवसर का लाभ उठाते हुए जीवन की वास्तविकता को समझने की कोशिश करते हैं। इस प्रकार, मौनी अमावस्या और महाकुंभ का संगम न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सामूहिक शांति, सद्भाव और समृद्धि का संदेश भी देता है। यह दिन हमें आत्म-निर्माण और आत्म-शुद्धि की ओर प्रेरित करता है, जिससे हम अपनी आत्मा को शुद्ध कर जीवन में सुख-शांति प्राप्त कर सकें।
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