टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राज्य स्तरीय बैंकर समिति (एसएलबीसी) ने बीते शनिवार को निर्णय लिया कि मार्च के अंत तक ऋण-जमा अनुपात को मौजूदा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 55 प्रतिशत किया जायेगा। एसएलबीसी की अध्यक्षता बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक एम कार्तिकेयन ने की।
बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर और वित्त सचिव प्रशांत कुमार भी उपस्थित थे। किशोर ने कहा- राज्य में ऋण-जमा अनुपात में वृद्धि हुई है, लेकिन यह राष्ट्रीय औसत 87 प्रतिशत की तुलना में अभी भी कम है। बैठक के दौरान वित्त मंत्री ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय को झारखंड से बिहार के पटना में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जतायी।
मंत्री ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि झारखंड में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की 120 शाखाएं हैं, जिनमें कुल जमा राशि 13,555 करोड़ रुपये है। बिहार में इसकी 236 शाखाएं हैं, जिनमें जमा राशि 15,743 करोड़ रुपये है। मैंने बैंक अधिकारियों से पूछा है कि झारखंड में जमा राशि अधिक होने पर भी बैंक को स्थानांतरित करने का क्या कारण है। यह झारखंड के हितों के खिलाफ है और स्वीकार्य नहीं है।
स्वागत भाषण में एसएलबीसी के महाप्रबंधक एवं बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय महाप्रबंधक मनोज कुमार ने कहा कि झारखंड का ऋण-जमा अनुपात पहली बार 50 प्रतिशत को पार कर 30 सितंबर, 2024 तक 50.22 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह दर्शाता है कि राज्य में बैंक ऋण प्रवाह में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं। राज्य में ऋण-जमा अनुपात 30 सितंबर, 2024 को 50.22 प्रतिशत दर्ज किया गया जबकि 30 सितंबर, 2023 को यह 45.04 प्रतिशत था।
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