एबीएन एडिटोरियल डेस्क। लोकसभा 2024 का चुनाव वस्तुत: एक धर्मयुद्ध है। इसको बहुत संजीदगी से सभी को लड़ना ही होगा। राजनीतिक जय-पराजय अपनी जगह है किंतु देश को जीतना चाहिए। राष्ट्र विजयी हो, ऐसा संकल्प होना चाहिए। इसके लिए प्रतिज्ञा की नहीं केवल संकल्प की आवश्यकता है।
प्रतिज्ञा में शक्ति नहीं होती। वह भीष्म बनाती है किंतु संकल्प शक्ति से भरी होती है। वह शिव बनाती है। शिव कल्याणकारी हैं। शिव से ही सत्य और सुंदर भी स्थापित हो पायेंगे। संकल्प और प्रतिज्ञा के बारे में श्रीमदभगवदगीता में भगवान कृष्ण ने बहुत सलीके से समझा दिया है। याद कीजिए कि जब जयद्रथ को मारने की प्रतिज्ञा अर्जुन कर लेते हैं कि सूर्यास्त तक नहीं मारा तो अग्नि समाधि ले लूंगा।
आचार्य द्रोण कमलव्यूह के अंदर जयद्रथ को छुपा देते हैं जिसका आकर 32 कोस का था। जाहिर है वह उस तक कैसे पहुंचते! जयद्रथ की सुरक्षा में बड़े बड़े वीर तैनात थे। भगवान कृष्ण बोले, अर्जुन तुम रास्ता साफ करो मैं रथ ले चलता हूं। संध्या हो आई अब भी 12 कोस रह गया। कृष्ण रथ से उतर गये। अर्जुन ने पूछा, केशव यह क्या? कृष्ण ने कहा अश्व थक गये हैं।
आगे बोलते हुये भगवान कृष्ण जो बोले वह ध्यान देने योग्य है। अर्जुन कदाचित तुमने मेरे उपदेश पर ध्यान नहीं दिया था जो युद्ध के शुरू में मैंने दिया था! तुम प्रतिज्ञा करने वाले होते कौन हो? तुम तो निमित्त हो, यदि तुम प्रतिज्ञा न किये होते तो अब तक जयद्रथ को मार देते। तुम्हारा ध्यान एक तरफ सूर्य पर है दूसरी तरफ जयद्रथ पर। इसलिये तुम्हारे निशाने चूक रहें हैं। ऐसा लक्ष्य तय कर दिये कि असफल होने पर तुम्हें ही विनष्ट कर देगा... यह डर ही तुम्हें हरा देगा।
भगवान के वचन बड़े सारगर्भित हैं। मुझे नहीं लगता आज तक किसी ने इतनी सुंदर यथार्थ बात की हो । कई संदर्भों में बात हो सकती है, लेकिन वर्तमान में देखिये सब प्रतिज्ञाबद्ध हो रहे हैं। यह क्या बात हुई कि अनुच्छेद 370 हटा दो तभी समर्थन करेंगे। पाकिस्तान पर हमला कर दो... तभी समर्थन करेंगे। राम मंदिर बना दो... तभी समर्थन करेंगे।
श्रीराम मंदिर बन गया। 370 हट चुका। तीन तलाक भी हट गया। सीएए भी लागू हो गया। देश के गृहमंत्री ने ताल ठोक कर डंके की चोट पर संकल्प दोहरा दिया कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी हमारा है। ध्यान दीजिए, भाजपा प्रतिज्ञापत्र नहीं जारी करती, वह हर चुनाव में संकल्प पत्र जारी करती है।
नेतृत्व सक्षम है किसी प्रतिज्ञा की आवश्यकता क्या है? सक्षम नेतृत्व केवल संकल्प लेता है और उसे हर हाल में पूरा भी करता है। आगे भी निश्चित ही दंडात्मक कार्य होगा और हो रहा है। यह ठीक है कि इस समय भावना प्रबल है परंतु इसी समय सुनियोजित तरीके से काम करने की आवश्यकता है। जो विरोधी हैं वह भी यही ढाल बना रहे हैं। फिलहाल उनसे न 370 से मतलब है न राम मंदिर से। गीता में भगवान ने कहा तो है :-
अपने खुद के धर्म से तुम्हें हिलना नहीं चाहिये क्योंकि न्याय के लिये किये गये युद्ध से बढ़कर एक क्षत्रिय के लिये कुछ नहीं है।
सुख दुख को, लाभ हानि को, जय और पराजय को एक सा देखते हुए ही युद्ध करो। ऐसा करते हुए तुम्हें पाप नहीं मिलेगा।
लेकिन यदि तुम यह न्याय युद्ध नहीं करोगे, तो अपने धर्म और यश की हानि करोगे और पाप प्राप्त करोगे।
इसलिए बाकी सब चिंतन छोड़कर, निस्संकोच योग्य एवं सक्षम नेतृत्व को ही चुनें, यही इस धर्मयुद्ध में आप सभी का आसन्न धर्म है, तथा इसी में राष्ट्रहित एवं धर्म हित सन्निहित है। (लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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