एबीएन न्यूजन नेटवर्क, दुमका। विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम मंदिर के मुख्य गुंबद से विधि विधान पूर्वक स्थापित पंचशूल को उतर गया। पंचशूल उतारने के साथ ही उसके दर्शन और स्पर्श करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। पंचशूल का विधि विधान पूर्वक पूजा कर फिर से बाबा मंदिर के गुंबद पर स्थापित किया जाएगा।
यह परंपरा बाबा बासुकीनाथ धाम मंदिर में बरसों से चली आ रही है। विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थान बाबा बासुकीनाथ धाम में महाशिवरात्रि की तैयारी को लेकर बाबा मंदिर के शिखर से पवित्र पंचशूल, त्रिशूल एवं कलश उतारा गया। इसके साथ ही चार दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव का आगाज हो गया।
इस दौरान महादेव, पार्वती मंदिर के ध्वज के साथ-साथ मंदिर परिसर में स्थित अन्य मंदिरों के शीर्ष से ध्वज उतारा गया, जिसे महाशिवरात्रि के दिन पुन: मंदिर के शीर्ष पर स्थापित किया जाएगा। पंचशूल उतारने के समय मंदिर प्रांगण में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। वहीं तमाम मंदिरों से उतारे गए धर्म ध्वज एवं गठजोड़ को प्रसाद रूप में पाने की लालसा लिए सभी भक्त अपनी बारी का इंतजार करते देखे गए।
बासुकीनाथ के पंडा पुरोहितों ने बताया कि महाशिवरात्रि के दिन बाबा के गुंबद से पंचशूल उतारने के बाद साफ सफाई और पंचशूल की पूजा विधि विधान पूर्वक की जाती है। इसके बाद पंचशूल को फिर से स्थापित किया जाता है। यह परंपरा बासुकिनाथ मंदिर में वर्षों से चली आ रही है, उसे आज भी निभाया जा रहा है।
विश्व प्रसिद्ध बाबा बासुकीनाथ धाम मंदिर के गुंबद से विधि पूर्वक पंचशूल को उतारा गया। आज पंचशूल की पूजा की जाएगी। उसके बाद फिर से कल दोपहर में बाबा मंदिर के मुख्य गुंबद पर उसे स्थापित किया जाएगा। उसके बाद ध्वजा चढ़ाया जाएगा।
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