क्यों जरूरी है महिला सशक्तिकरण : योगाचार्य महेश पाल

 

एबीएन सोशल डेस्क। जैसा कि हम सभी जानते हैं हर साल की भांति इस साल भी 8 मार्च को इंस्पायर इनक्लूजन (एक ऐसी दुनिया, जहां हर किसी को बराबर का हक और सम्मान मिले) थीम के साथ अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है। 

इस दिन महिला सशक्तिकरण से संबंधित बड़े-बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं और राजनीति से लेकर साइंस, कला, संस्कृति और भी कई दूसरे क्षेत्रों में अपना योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाता है, यह भारत ही नहीं पूरे विश्व में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं  युनाइटेड नेशन्स ने 8 मार्च 1975 को महिला दिवस मनाने की शुरुआत की थी।

8 मार्च का यह खास दिन महिलाओं को समान हक सम्मान को लेकर जागरूकता पैदा करने के लिए मनाया जाता है महिला दिवस मनाने के लिए 8 मार्च का दिन चुनने की एक खास वजह है। दरअसल अमेरिका में काम करने वाली महिलाओं ने 8 मार्च को अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन छेड़ा था। सोशलिस्ट पार्टी आफ अमेरिका ने न्यूयॉर्क में 1908 में वर्कर्स को सम्मान देने के मकसद से ये दिन चुना था। वहीं रूसी महिलाओं ने महिला दिवस मनाते हुए पहले विश्व युद्ध का विरोध किया था।

रूस की महिलाओं ने ब्रेड एंड पीस को लेकर 1917 में हड़ताल की थी। यूरोप में महिलाओं ने 8 मार्च को पीस एक्टिविस्ट्स को सपोर्ट करने के लिए रैलियां निकाली थीं।इस वजह से 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरूआत हुई। बाद में 1975 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को मानने की मान्यता दे दी गयी, सशक्तिकरण शब्द से तात्पर्य किसी व्यक्ति की उस क्षमता से है जिससे उसमें ये योग्यता आ जाती है की वो अपने जीवन से जुड़े सभी निर्णय स्वयं ले सके। 

महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे है जहां महिलाएं परिवार और समाज के सभी बंधनों से मुक्त होकर अपने निर्णयों की निमार्ता खुद हो। लोगों को जगाने के लिए महिलाओं का जागृत होना जरुरी है। एक बार जब वो अपना कदम उठा लेती है, परिवार आगे बढ़ता है, गांव आगे बढ़ता है और राष्ट्र विकास की ओर उन्मुख होता है। 

भारत में, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये सबसे पहले समाज में उनके अधिकारों और मूल्यों को मारने वाले उन सभी राक्षसी सोच को मारना जरुरी है महिलाओं के विकास में अवरोध पैदा करते हैं जैसे दहेज प्रथा, अशिक्षा, यौन हिंसा, असमानता, भ्रूण हत्या, महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा  मानव तस्करी इसलिए महिला सशक्तिकरण जरूरी है,लैंगिक भेदभाव राष्ट्र में सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अंतर ले आता है जो देश को पीछे की ओर ढकेलता है। 

भारत के संविधान में उल्लिखित समानता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना सबसे प्रभावशाली उपाय है इस तरह की बुराईयों को मिटाने के लिये। लैंगिक समानता को प्राथमिकता देने से पूरे भारत में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा मिला है। महिला सशक्तिकरण के उच्च लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये इसे हर एक परिवार में बचपन से प्रचारित व प्रसारित करना चाहिये। 

ये जरुरी है कि महिलाएँ शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रुप से मजबूत हो, चूंकि एक बेहतर शिक्षा की शुरूआत बचपन से घर पर हो सकती है, महिलाओं के उत्थान के लिये एक स्वस्थ परिवार की जरुरत है जो राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिये आवश्यक है। आज भी कई पिछड़े क्षेत्रों में माता-पिता की अशिक्षा, असुरक्षा और गरीबी की वजह से कम उम्र में विवाह और बच्चे पैदा करने का चलन है। 

महिलाओं को मजबूत बनाने के लिये महिलाओं के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार, लैंगिक भेदभाव, सामाजिक अलगाव तथा हिंसा आदि को रोकने के लिये सरकार द्वारा कई सारे कदम उठाएं जा रहे हैं। सरकार को महिलाओं के वास्तविक विकास के लिये पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी जाना होगा और वहां की महिलाओं को सरकार की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं और उनके अधिकारों से अवगत कराना होगा जिससे उनका भविष्य बेहतर हो सके। महिला सशक्तिकरण के सपने को सच करने के लिये लड़िकयों के महत्व और उनकी शिक्षा को प्रचारित करने की जरुरत है।

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